उत्तराखंड में जल जीवन मिशन को लेकर बड़ा संकट खड़ा होता नजर आ रहा है। भुगतान न मिलने से परेशान ठेकेदारों ने सख्त रुख अपनाते हुए 6 अप्रैल को 24 घंटे के लिए जल आपूर्ति पूरी तरह बंद करने की चेतावनी दी है। इसके साथ ही देहरादून में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया गया है।
ठेकेदारों का अल्टीमेटम और प्रदर्शन का ऐलान
देवभूमि जल शक्ति कांट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन से जुड़े ठेकेदारों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को संबोधित पत्र जारी कर अपनी समस्याएं रखीं। एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित अग्रवाल ने बताया कि लंबे समय से भुगतान लंबित होने के कारण ठेकेदारों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है।
“भूखे मरने की नौबत”— ठेकेदारों की पीड़ा
अमित अग्रवाल ने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत कार्य करने वाले ठेकेदारों ने प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए बैंक से ऋण लिया और अपनी संपत्ति तक गिरवी रखी। इसके बावजूद अब वे न तो लोन का ब्याज चुका पा रहे हैं और न ही कर्मचारियों को वेतन दे पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ, तो ठेकेदारों के सामने भूखे मरने की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
₹700 करोड़ के भुगतान पर सवाल
एसोसिएशन का दावा है कि केंद्र सरकार द्वारा उत्तराखंड को लगभग 700 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई थी, लेकिन वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बावजूद यह राशि ठेकेदारों तक नहीं पहुंची। ठेकेदारों ने इस मामले में पारदर्शिता की मांग उठाई है।
24 घंटे जल आपूर्ति बंद करने की चेतावनी
ठेकेदारों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई, तो 6 अप्रैल सुबह 6 बजे से 7 अप्रैल सुबह 6 बजे तक प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जल आपूर्ति पूरी तरह बंद रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस दौरान आम जनता को होने वाली असुविधा की जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
देहरादून में होगा विरोध प्रदर्शन
ठेकेदारों ने घोषणा की है कि 6 अप्रैल को देहरादून में एकत्रित होकर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। एसोसिएशन के अनुसार यह उनका अंतिम कदम है और यदि इसके बाद भी समाधान नहीं निकला, तो जल जीवन मिशन का संचालन पूरी तरह बंद किया जा सकता है।
सरकार पर उत्पीड़न के आरोप
अमित अग्रवाल ने आरोप लगाया कि ठेकेदार लंबे समय से प्रशासनिक और विभागीय उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को कई बार शासन और अधिकारियों के सामने उठाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
बढ़ता दबाव, सख्त फैसला
एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि ठेकेदारों पर आर्थिक और मानसिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में संगठन को मजबूर होकर यह सख्त निर्णय लेना पड़ा है।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
इस पूरे घटनाक्रम ने सरकार और प्रशासन के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो इसका सीधा असर आम जनता की जल आपूर्ति पर पड़ेगा और प्रदेश में जल संकट की स्थिति बन सकती है।









