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आईएचसीएल ने ‘हेरिट-ऐज सेलिब्रेशन’ के साथ मनाया विश्व विरासत दिवस, सांस्कृतिक धरोहर को दिया नया आयाम

BPC News National Desk
3 Min Read

Indian Hotels Company Limited (आईएचसीएल) ने World Heritage Day के अवसर पर देशभर में अपने चुनिंदा होटलों में ‘हेरिट-ऐज सेलिब्रेशन’ का आयोजन किया। इस पहल का उद्देश्य भारत की समृद्ध अमूर्त सांस्कृतिक विरासत को एक मंच प्रदान करना और स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाना रहा।

‘पथ्य’ फ्रेमवर्क के तहत हुआ आयोजन

आईएचसीएल के ईएसजी प्लस फ्रेमवर्क ‘पथ्य’ के मार्गदर्शन में आयोजित इस दो दिवसीय कार्यक्रम का फोकस परंपराओं के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय कारीगरों और समुदायों को समर्थन देना था। कंपनी का यह प्रयास जिम्मेदार और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

गौरव पोखरियाल ने बताई पहल की अहमियत

आईएचसीएल के मानव संसाधन के कार्यकारी उपाध्यक्ष Gaurav Pokhariyal ने कहा कि भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत यहां के लोगों, समुदायों और शिल्पियों पर आधारित है, जो पीढ़ियों से इन परंपराओं को जीवित रखे हुए हैं। उन्होंने बताया कि ‘पथ्य’ के माध्यम से कंपनी इन परंपराओं को संरक्षित करने के साथ स्थानीय आजीविका को भी बढ़ावा दे रही है।

देशभर में आयोजित हुए विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम

17 और 18 अप्रैल को आयोजित ‘हेरिट-ऐज सेलिब्रेशन’ के तहत विभिन्न होटलों में क्षेत्रीय संस्कृति को दर्शाने वाले कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन आयोजनों में स्थानीय व्यंजन, कला, शिल्प और पारंपरिक गतिविधियों को प्रमुखता दी गई, जिससे मेहमानों को भारत की विविधता का अनुभव मिला।

ताज होटलों में दिखी विरासत की झलक

Taj Lake Palace में आयोजित कुकिंग क्लास में पारंपरिक व्यंजनों को फिर से जीवंत किया गया।
Taj Exotica Resort & Spa में ऐतिहासिक चर्चों की गाइडेड हेरिटेज वॉक कराई गई।
Rambagh Palace में विरासत संरक्षण पर विशेष सत्र आयोजित किया गया।
Taj Sawai Ranthambore में शिल्प कार्यशालाओं के जरिए पारंपरिक हस्तशिल्प को प्रदर्शित किया गया।
Taj Santacruz में लोकल फूड फेस्टिवल आयोजित हुआ।
Taj Rishikesh Resort & Spa में योग और वैदिक मंत्रोच्चार के जरिए आध्यात्मिक अनुभव कराया गया।

बच्चों और कारीगरों को मिला विशेष मंच

कार्यक्रम के दौरान बच्चों के लिए इंटरैक्टिव स्टोरीटेलिंग सेशन आयोजित किए गए, जिससे उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का प्रयास किया गया। साथ ही हेरिटेज हॉल पॉप-अप के माध्यम से गुजरात की बंधनी और रोगन कला, राजस्थान की ब्लॉक प्रिंटिंग और तमिलनाडु की तंजौर पेंटिंग जैसी पारंपरिक कलाओं को प्रदर्शित किया गया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बढ़ाई आयोजन की गरिमा

शाम के समय लोक संगीत, नृत्य और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने आयोजन को और खास बना दिया। इन प्रस्तुतियों के जरिए भारत की विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि को प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया गया।

विरासत और विकास का संगम

आईएचसीएल की यह पहल न केवल सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में सराहनीय है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि आधुनिक आतिथ्य उद्योग परंपराओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ‘हेरिट-ऐज सेलिब्रेशन’ के माध्यम से यह साबित हुआ कि विकास और विरासत एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।

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