उत्तराखंड की पवित्र धरती पर आज आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब ओंकारेश्वर मंदिर से भगवान केदारनाथ की उत्सव डोली विधि-विधान के साथ प्रस्थान कर गई। बाबा केदार अब हिमालय की ऊंचाइयों में स्थित केदारनाथ धाम की ओर अग्रसर हैं।
भक्ति के माहौल में हुआ डोली का प्रस्थान
सुबह से ही ऊखीमठ में स्थित ओंकारेश्वर मंदिर परिसर में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और विशेष अनुष्ठानों के बाद बाबा केदार की पंचमुखी डोली को पूरे विधि-विधान के साथ रवाना किया गया।
जैसे ही डोली ने प्रस्थान किया, “बम-बम भोले” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।

पहला पड़ाव फाटा, आज होगा रात्रि विश्राम
इस दिव्य यात्रा का पहला पड़ाव फाटा तय किया गया है, जहां डोली आज रात्रि विश्राम करेगी।
यात्रा के दौरान:
- सेना के बैंड की मधुर धुनें
- ढोल-दमाऊं की पारंपरिक थाप
- श्रद्धालुओं के भक्ति गीत
ने पूरे मार्ग को भक्तिमय बना दिया। रास्ते भर स्थानीय लोगों ने फूलों की वर्षा कर डोली का स्वागत किया।

सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन
बाबा केदार की यह यात्रा सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है। शीतकाल में भारी बर्फबारी के कारण केदारनाथ धाम बंद रहता है और पूजा ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में होती है। ग्रीष्मकाल में बाबा की डोली पुनः केदारनाथ धाम के लिए रवाना होती है।

आगे का यात्रा कार्यक्रम
यात्रा के अगले चरण में डोली:
- फाटा से आगे बढ़कर गौरीकुंड पहुंचेगी
- इसके बाद केदारनाथ धाम के लिए अंतिम चरण की यात्रा शुरू होगी
गौरीकुंड से श्रद्धालु पैदल यात्रा कर धाम तक पहुंचते हैं।
22 अप्रैल को खुलेंगे केदारनाथ धाम के कपाट
केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को शुभ मुहूर्त में श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। इस ऐतिहासिक क्षण के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंच चुके हैं।

यात्रा के लिए व्यापक इंतजाम
प्रशासन और उत्तराखंड पुलिस ने यात्रा को सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की हैं:
- पुलिस बल की तैनाती
- आपदा प्रबंधन टीमें सक्रिय
- स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध
- मार्ग में सहायता केंद्र और मेडिकल कैंप
आस्था और संस्कृति का संगम
यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और सामुदायिक एकता का प्रतीक है। ऊखीमठ से लेकर फाटा और गौरीकुंड तक हर स्थान पर श्रद्धालुओं का उत्साह देखने को मिल रहा है।
बाबा केदार की यह पावन यात्रा आस्था, विश्वास और भक्ति का अद्भुत संगम है, जो हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। अब सभी की निगाहें 22 अप्रैल पर टिकी हैं, जब बाबा केदार अपने धाम में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे।









