उत्तराखंड की राजनीति में गढ़वाल लोकसभा सीट हमेशा से शक्ति का केंद्र रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी ने यहाँ से भारी बहुमत से जीत दर्ज की थी। नरेंद्र मोदी की लहर और दिग्गज नेताओं के प्रचार के बीच जनता ने बलूनी को ‘अग्रणी गढ़वाल’ के विजन पर वोट दिया।
आज करीब दो साल बाद, सवाल यह है कि क्या घोषणाएं धरातल पर उतरी हैं? आइये, शिक्षा, स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यटन के मोर्चे पर हुए कार्यों का विश्लेषण करते हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यटन: योजनाओं से धरातल तक
सांसद अनिल बलूनी ने गढ़वाल को देश की “अग्रणी लोकसभा” बनाने का रोडमैप पेश किया था। इस दिशा में कुछ बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू हुआ है:
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पौड़ी तारामंडल (Planetarium): पौड़ी में अंतरिक्ष तारामंडल का निर्माण कार्य तेज गति से चल रहा है। यह न केवल शिक्षा बल्कि ‘एस्ट्रो-टूरिज्म’ के लिए भी मील का पत्थर साबित होगा।
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रोपवे परियोजनाएं: केदारनाथ धाम और हेमकुंड साहिब के लिए रोपवे को मंजूरी मिलना एक बड़ी उपलब्धि है, जिससे तीर्थयात्रियों की राह आसान होगी।
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अन्य पहल: तुंगनाथ क्षेत्र में बायो-टॉयलेट और औली में विंटर गेम्स को बढ़ावा देने जैसे कार्यों से स्थानीय पर्यटन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
शिक्षा और स्वास्थ्य: बुनियादी सेवाओं में सुधार
गढ़वाल के दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर सुविधाओं के लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:
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केंद्रीय विद्यालय: क्षेत्र को 4 नए केंद्रीय विद्यालयों की सौगात मिली है (कोटद्वार, नरेंद्रनगर, थराली और एक अन्य)। कोटद्वार में कक्षाएं शुरू हो चुकी हैं, जबकि अन्य जगहों पर भूमि आवंटन और निर्माण की प्रक्रिया जारी है।
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स्वास्थ्य सेवा: कोटद्वार और उत्तरकाशी में ICU बेड का निर्माण कार्य शुरू होना एक राहत भरी खबर है।
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आर्मी बैटल अस्पताल: कोटद्वार में सेना के अस्पताल की स्वीकृति को सीमावर्ती सामरिक दृष्टि और पूर्व सैनिकों की सुविधा के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है।
रेल और सड़क कनेक्टिविटी: गढ़वाल की नई लाइफलाइन
पहाड़ की सबसे बड़ी चुनौती कनेक्टिविटी रही है। बलूनी के कार्यकाल में रेल सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया गया:
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नई ट्रेनें: कोटद्वार-आनंद विहार रात्रि ट्रेन और जनशताब्दी एक्सप्रेस की शुरुआत ने दिल्ली-गढ़वाल की दूरी कम की है।
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वंदे भारत: देहरादून-आनंद विहार वंदे भारत का नजीबाबाद में स्टॉपेज मिलना कोटद्वार और पौड़ी के यात्रियों के लिए वरदान साबित हुआ है।
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सड़कें: PMGSY के तहत ग्रामीण सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है और लक्ष्मण झूला क्षेत्र में बजरंग सेतु का निर्माण कार्य प्रगति पर है।
सांस्कृतिक विरासत और जनसुविधाएं
बलूनी ने गढ़वाल की अस्मिता और पहचान को राष्ट्रीय पटल पर रखने का प्रयास किया है:
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इगास पर्व: लोकपर्व इगास को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट कर उन्होंने प्रवासियों को अपनी जड़ों से जोड़ने की कोशिश की।
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कण्वाश्रम: इसे राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा दिलाने के प्रयास जारी हैं।
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पासपोर्ट कार्यालय: कोटद्वार में पासपोर्ट सेवा केंद्र खुलने से युवाओं को अब देहरादून या दिल्ली के चक्कर नहीं काटने पड़ते।
जमीनी हकीकत बनाम दावे: क्या कहते हैं लोग?
लगभग 22 महीनों के कार्यकाल में 20 से अधिक बड़ी परियोजनाओं की स्वीकृति का दावा किया जा रहा है। लेकिन, सिक्के का दूसरा पहलू भी है:
“कई योजनाएं अभी भी ‘निर्माणाधीन’ या ‘प्रस्तावित’ की श्रेणी में हैं। जोशीमठ में मिनी स्टेडियम और रामनगर-धनगढ़ी पुल जैसे प्रोजेक्ट्स का लाभ जनता को तभी मिलेगा जब ये समय पर पूरे होंगे।”
स्थानीय प्रतिक्रियाएं:
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सकारात्मक पक्ष: लोग मानते हैं कि केंद्र में मजबूत पकड़ होने के कारण बलूनी बड़े प्रोजेक्ट्स लाने में सफल रहे हैं।
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चुनौतीपूर्ण पक्ष: पलायन और बेरोजगारी जैसे स्थायी मुद्दों पर अभी भी ठोस जमीनी बदलाव का इंतजार है।
निष्कर्ष: बदली तस्वीर या अभी लंबा है रास्ता?
निश्चित रूप से अनिल बलूनी के कार्यकाल में गढ़वाल में विकास की एक नई सुगबुगाहट दिखी है। बजट आवंटन और नई ट्रेनों की शुरुआत ने जनता में उम्मीद जगाई है। हालांकि, गढ़वाल की तस्वीर पूरी तरह बदली है या नहीं, इसका फैसला आने वाले 3 सालों में परियोजनाओं के पूर्ण होने पर निर्भर करेगा।









