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इंडिया ऑटिज़्म सेंटर ने राष्ट्रीय कॉन्क्लेव में रखा समावेशी आवासीय देखभाल का विज़न, ‘सामावेश’ पहल पर खास जोर

BPC News National Desk
5 Min Read

देहरादून: India Autism Center ने विशेष आवश्यकताओं वाले व्यक्तियों के लिए समर्पित देखभाल व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। संस्था ने प्रथम ALFOC National Conclave में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए समावेशी आवासीय देखभाल के अपने विज़न को प्रस्तुत किया। यह एक दिवसीय संगोष्ठी भारत में असिस्टेड लिविंग के क्षेत्र में संवाद, सहयोग और भविष्य की रणनीतियों को दिशा देने के उद्देश्य से आयोजित की गई।

राष्ट्रीय कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों और संगठनों की भागीदारी

कॉन्क्लेव में देशभर से विशेषज्ञों, संगठनों, नीति-निर्माताओं और परिवारों ने हिस्सा लिया। इस मंच ने विचार-विमर्श और अनुभव साझा करने का एक प्रभावी अवसर प्रदान किया। विभिन्न प्रतिभागियों ने असिस्टेड लिविंग के वर्तमान परिदृश्य और भविष्य की संभावनाओं पर गहन चर्चा की।

‘सामावेश’ पहल के जरिए दीर्घकालिक देखभाल का विज़न

इस दौरान आईएसी ने अपनी आगामी आवासीय पहल ‘सामावेश’ को प्रस्तुत किया, जो समावेशी और दीर्घकालिक देखभाल का एक व्यापक मॉडल है। इस पहल का उद्देश्य इसे भारत के सबसे बड़े आजीवन आवासीय देखभाल तंत्र के रूप में विकसित करना है।

‘सामावेश’ न्यूरोडाइवर्स व्यक्तियों को सुरक्षित, सम्मानजनक और स्वतंत्र जीवन प्रदान करने की दिशा में कार्य करेगा, जिससे वे समाज में बेहतर ढंग से समाहित हो सकें।

दीर्घकालिक देखभाल की बढ़ती आवश्यकता पर जोर

कार्यक्रम में Jaishankar Natarajan (निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, आईएसी) ने अपने संबोधन में कहा कि भारत इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां ऑटिज़्म और अन्य विकासात्मक स्थितियों वाले व्यक्तियों के लिए दीर्घकालिक देखभाल की योजना बनाना अत्यंत आवश्यक हो गया है।

उन्होंने बढ़ती जीवन प्रत्याशा के संदर्भ में एक सुदृढ़ और टिकाऊ आवासीय तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे प्रत्येक जीवन चरण में गरिमा, स्वतंत्रता और निरंतर देखभाल सुनिश्चित की जा सके।

विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव और चुनौतियां

कॉन्क्लेव में असिस्टेड लिविंग क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। इनमें Neena Wagh, Mugdha Kalra, Seema Chaddha, Sangeeta Jain, Kavita Beniwal और Jitendra P S Solanki शामिल रहे।

इन सभी ने असिस्टेड लिविंग के संचालन, भावनात्मक पहलुओं और व्यावहारिक चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की।

पैनल चर्चा में उभरे सहयोग और मानकीकरण के मुद्दे

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण पैनल चर्चा रही, जिसका संचालन Mugdha Kalra ने किया। चर्चा के दौरान वक्ताओं ने बताया कि असिस्टेड लिविंग केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि परिवारों के लिए भरोसे और सुरक्षा का आधार है।

उन्होंने इस क्षेत्र में मानकीकरण, स्पष्ट दिशा-निर्देश और सतत सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।

जागरूकता बढ़ाने और भरोसा कायम करने की जरूरत

इस अवसर पर Neena Wagh ने कहा कि भारत में असिस्टेड लिविंग को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अभी भी कई परिवारों के लिए यह क्षेत्र अनिश्चितताओं से भरा हुआ है।

उन्होंने कहा कि परिवार केवल देखभाल सुविधा नहीं, बल्कि ऐसा वातावरण चाहते हैं जहां उनके प्रियजन सम्मान, अपनत्व और आत्मनिर्भरता के साथ जीवन जी सकें।

समग्र पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की दिशा में कदम

आईएसी की ‘सामावेश’ पहल को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह न केवल आवासीय देखभाल प्रदान करेगी, बल्कि एक समग्र पारिस्थितिकी तंत्र भी विकसित करेगी, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सहभागिता और व्यक्तिगत विकास को समान महत्व दिया जाएगा।

यह मॉडल विशेष आवश्यकताओं वाले व्यक्तियों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उनके परिवारों को दीर्घकालिक सुरक्षा और मानसिक शांति प्रदान करेगा।

असिस्टेड लिविंग के भविष्य को मिली नई दिशा

कुल मिलाकर, प्रथम ALFOC National Conclave ने भारत में असिस्टेड लिविंग के भविष्य को लेकर एक सकारात्मक और ठोस दिशा प्रदान की है।

India Autism Center की सक्रिय भागीदारी और दूरदर्शी पहलें इस क्षेत्र में बदलाव की मजबूत नींव रखती नजर आ रही हैं, जो आने वाले समय में लाखों परिवारों के जीवन में सार्थक परिवर्तन ला सकती हैं।

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