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पश्चिम बंगाल के 15 मतदान केंद्रों पर दोबारा वोटिंग का फैसला, निर्वाचन आयोग ने पुराने मतदान को किया निरस्त

BPC News National Desk
4 Min Read

भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में मतदान प्रक्रिया को लेकर मिली शिकायतों और जिला स्तर की रिपोर्टों के आधार पर बड़ा फैसला लेते हुए कुछ मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान कराने की घोषणा की है। आयोग ने दक्षिण 24 परगना जिले के कुल 15 मतदान केंद्रों पर दोबारा मतदान कराने का निर्णय लिया है। इनमें मगराहाट पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के 11 मतदान केंद्र और डायमंड हार्बर क्षेत्र के 4 बूथ शामिल हैं।

निर्वाचन आयोग के अनुसार इन बूथों पर 29 अप्रैल 2026 को हुए मतदान को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 58(2) के तहत शून्य घोषित कर दिया गया है। अब इन सभी केंद्रों पर 2 मई 2026 को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक नए सिरे से मतदान कराया जाएगा। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय रिटर्निंग अधिकारियों और चुनाव पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है, जिनमें मतदान प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं और शिकायतों का उल्लेख किया गया था।

क्यों लिया गया पुनर्मतदान का फैसला?

पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान राजनीतिक तनाव और हिंसा की घटनाएं पहले भी चर्चा का विषय रही हैं। इस बार भी मतदान के दौरान कुछ क्षेत्रों से बूथ कब्जाने, मतदाताओं को प्रभावित करने और मतदान प्रक्रिया में बाधा डालने जैसी शिकायतें सामने आई थीं। निर्वाचन आयोग ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच कराई और संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी।

आयोग की ओर से जारी बयान में कहा गया कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि किसी भी मतदान केंद्र पर चुनाव प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका होती है, तो आयोग आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

सुरक्षा व्यवस्था होगी कड़ी

निर्वाचन आयोग ने संबंधित जिलों के प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को पुनर्मतदान के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त पुलिस बल और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की जाएगी, ताकि मतदान शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो सके।

स्थानीय प्रशासन ने भी पुनर्मतदान को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। मतदान कर्मियों की तैनाती, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की व्यवस्था और सुरक्षा बलों की निगरानी को लेकर विशेष योजना बनाई गई है।

राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया

पुनर्मतदान के फैसले पर विभिन्न राजनीतिक दलों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। विपक्षी दलों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे लोकतंत्र में लोगों का विश्वास मजबूत होगा। उनका कहना है कि जिन क्षेत्रों में मतदाता स्वतंत्र रूप से मतदान नहीं कर पाए, वहां दोबारा मतदान कराया जाना जरूरी था।

वहीं सत्तारूढ़ दल के नेताओं का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए आयोग जो भी निर्णय ले रहा है, उसका सम्मान किया जाना चाहिए।

मतदाताओं से अपील

निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे बिना किसी डर या दबाव के मतदान में हिस्सा लें। आयोग ने भरोसा दिलाया है कि पुनर्मतदान के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

लोकतंत्र की मजबूती की दिशा में कदम

चुनाव विशेषज्ञों का मानना है कि पुनर्मतदान का फैसला लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि किसी मतदान केंद्र पर गड़बड़ी की पुष्टि होती है, तो वहां दोबारा मतदान कराना मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करने का प्रभावी तरीका है।

दक्षिण 24 परगना जैसे महत्वपूर्ण जिले में पुनर्मतदान का फैसला राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। अब सभी की नजर 2 मई को होने वाले मतदान पर टिकी हुई है।

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