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गाजियाबाद विकास प्राधिकरण पर उठे सवाल, जोन-4 में नियमों को ताक पर रखकर हो रहे अवैध निर्माण

BPC News National Desk
4 Min Read

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) एक बार फिर अवैध निर्माण और कथित प्रशासनिक लापरवाही को लेकर सवालों के घेरे में है। शहर में लगातार बढ़ते अनियंत्रित निर्माण ने न सिर्फ नियोजन व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि स्थानीय नागरिकों में भी नाराजगी बढ़ा दी है। सबसे अधिक शिकायतें जोन-4 क्षेत्र से सामने आ रही हैं, जहां अवैध निर्माण के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है।

जोन-4 में अवैध निर्माण पर गंभीर आरोप

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि जो भवन पहले GDA द्वारा अवैध घोषित कर सील किए गए थे, उनमें भी निर्माण कार्य जारी है। कई स्थानों पर रात के समय और छुट्टियों में तेजी से निर्माण गतिविधियां होने की शिकायतें सामने आई हैं।

लोगों का कहना है कि बिना किसी वैध मानचित्र और अनुमति के बहुमंजिला इमारतें खड़ी की जा रही हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग की ओर से कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित दिखाई देती है।

सीलिंग के बाद भी निर्माण जारी, उठे सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि सील किए गए भवनों में दोबारा निर्माण कैसे शुरू हो रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यह सब बिना विभागीय मिलीभगत के संभव नहीं है।

कई मामलों में शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने या देरी से होने की बात भी सामने आई है, जिससे लोगों का भरोसा प्रशासनिक व्यवस्था पर कमजोर हो रहा है।

भ्रष्टाचार और निर्माण माफिया के गठजोड़ के आरोप

आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ भ्रष्ट अधिकारी और निर्माण माफिया मिलकर नियमों की अनदेखी कर रहे हैं।

पहले भवनों को सील किया जाता है, लेकिन बाद में कथित तौर पर सांठगांठ के जरिए दोबारा निर्माण शुरू हो जाता है। इससे अवैध निर्माण पर कार्रवाई की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

विशेषज्ञों की चेतावनी, सुरक्षा पर खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि बिना स्वीकृत नक्शे और सुरक्षा मानकों के बने भवन भविष्य में बड़े हादसों का कारण बन सकते हैं।

संकरी गलियों में बने बहुमंजिला भवनों में पार्किंग, अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन निकासी जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं का अभाव गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

शहरी व्यवस्था पर बढ़ता दबाव

अवैध निर्माण से शहर की यातायात व्यवस्था, सीवर सिस्टम और बिजली नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अनियोजित विकास भविष्य में जलभराव, ट्रैफिक जाम और बुनियादी ढांचे की विफलता जैसी समस्याओं को और गंभीर बना सकता है।

शिकायतों की अनदेखी पर नाराजगी

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायतें देने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होती। कुछ मामलों में शिकायतकर्ताओं पर दबाव बनाए जाने की भी बात कही जा रही है।

इससे आम जनता में असंतोष बढ़ रहा है और प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

जांच और सख्त कार्रवाई की मांग

सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि जोन-4 में चल रहे सभी संदिग्ध निर्माण कार्यों की उच्चस्तरीय जांच हो।

साथ ही जिन अधिकारियों की निगरानी में यह अवैध निर्माण हो रहा है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की जा रही है।

गाजियाबाद में अवैध निर्माण का बढ़ता नेटवर्क प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। नागरिकों को उम्मीद है कि प्राधिकरण इस मामले में पारदर्शी जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करेगा, ताकि शहर का सुनियोजित विकास सुनिश्चित किया जा सके।

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