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गाजियाबाद में आतंकवाद विरोधी अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू, वैश्विक सुरक्षा रणनीति पर मंथन

BPC News National Desk
3 Min Read

गाजियाबाद स्थित Central Detective Training Institute में आतंकवाद और कट्टरपंथ जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। “आतंकवाद निरोध एवं कट्टरपंथ उन्मूलन” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में भारत सहित कई देशों के वरिष्ठ पुलिस और सुरक्षा अधिकारी भाग ले रहे हैं। यह प्रशिक्षण 11 से 13 मई तक चलेगा।

कार्यक्रम का उद्घाटन और मुख्य संदेश

कार्यक्रम का उद्घाटन भारत सरकार के संयुक्त सचिव Nachiketa Jha ने किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद और कट्टरपंथ अब किसी एक देश की समस्या नहीं रहे, बल्कि यह वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए केवल पारंपरिक सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि आधुनिक तकनीक, मजबूत खुफिया तंत्र और अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है।

आधुनिक तकनीक और साइबर सुरक्षा पर जोर

संयुक्त सचिव ने कहा कि आतंकवादी संगठन डिजिटल प्लेटफॉर्म और नई तकनीकों का तेजी से उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों को भी साइबर निगरानी, डेटा विश्लेषण और तकनीकी खुफिया प्रणाली को मजबूत करना होगा।

उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान को अपने कार्यक्षेत्र में प्रभावी ढंग से लागू करें।

प्रशिक्षण की रूपरेखा और उद्देश्य

संस्थान के निदेशक Sachin Gupta ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों की क्षमता को बढ़ाना है।

इसमें मुख्य रूप से निम्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है:

  • आतंकवाद निरोध रणनीति
  • साइबर मॉनिटरिंग और डिजिटल जांच तकनीक
  • कट्टरपंथ की पहचान और रोकथाम
  • आधुनिक खुफिया विश्लेषण प्रणाली

अंतरराष्ट्रीय भागीदारी बनी खास आकर्षण

इस प्रशिक्षण की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी अंतरराष्ट्रीय भागीदारी है।

इसमें CSC सदस्य देशों—Bangladesh, Maldives, Mauritius, Seychelles और Sri Lanka के कुल 9 विदेशी पुलिस अधिकारी शामिल हैं।

इसके अलावा भारतीय राज्य पुलिस, CAPF और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी भी भाग ले रहे हैं। कुल 30 वरिष्ठ अधिकारी इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा हैं।

बदलते खतरे और नई चुनौतियां

विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कट्टरपंथी विचारधाराएं तेजी से फैल रही हैं।

ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के सामने तकनीकी और वैचारिक दोनों स्तर पर नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं, जिन्हें आधुनिक प्रशिक्षण के माध्यम से ही प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है।

समापन और धन्यवाद ज्ञापन

कार्यक्रम के दौरान उप-प्रधानाचार्य प्रमोद कुमार जोशी ने प्रतिभागियों का स्वागत किया।

वहीं पाठ्यक्रम समन्वयक O.P. Sharma ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी प्रतिभागियों और अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

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