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कंपनी की छवि धूमिल करने और आर्थिक नुकसान पहुंचाने के आरोप में मामला दर्ज, जांच शुरू

BPC News National Desk
5 Min Read

Eros Technologies ने कुछ व्यक्तियों पर कंपनी की साख खराब करने, आर्थिक नुकसान पहुंचाने और सुनियोजित षड्यंत्र रचने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस मामले में कंपनी प्रशासन की ओर से Vijay Nagar और Noida के संबंधित थानों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है।

भाजपा नेता बताकर बनाई कंपनी में पहुंच

कंपनी के अनुसार विकास डागर नामक व्यक्ति ने स्वयं को भारतीय जनता पार्टी का प्रभावशाली नेता बताते हुए कंपनी में अपनी पहुंच बनाई। आरोप है कि उसने कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं से करीबी संबंध होने का दावा किया और इसी आधार पर कंपनी का विश्वास हासिल किया।

कंपनी का कहना है कि विकास डागर ने प्रबंधन को भरोसा दिलाया कि वह एक अन्य कंपनी को ईरोस टेक्नोलॉजीज का अधिकृत वेंडर बनवा सकता है तथा कंपनी को विभिन्न व्यावसायिक लाभ और प्रोजेक्ट दिलाने में मदद करेगा।

सात महीने तक लिया मोटा वेतन

कंपनी प्रशासन के मुताबिक विकास डागर को उसके दावों और कथित राजनीतिक प्रभाव के आधार पर जिम्मेदारी दी गई। आरोप है कि करीब सात महीनों तक वह कंपनी से लगभग डेढ़ लाख रुपये प्रतिमाह वेतन प्राप्त करता रहा।

बाद में जब कंपनी प्रबंधन ने तथ्यों की जांच की, तो उसके दावों में कथित रूप से सच्चाई नहीं पाई गई। इसके बाद कंपनी ने उसे तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया।

सोशल मीडिया के जरिए साजिश रचने का आरोप

ईरोस टेक्नोलॉजीज का आरोप है कि कंपनी से निकाले जाने के बाद विकास डागर ने जसप्रीत सिंह पुरी, विकल शर्मा और हिमांशु कुमार के साथ मिलकर कंपनी के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया।

कंपनी के अनुसार:

  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन समेत अन्य माध्यमों पर
  • कंपनी के खिलाफ भ्रामक जानकारी फैलाई गई,
  • गलत आरोप लगाए गए,
  • और व्यापारिक छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।

डेढ़ करोड़ रुपये तक नुकसान की आशंका

कंपनी प्रशासन का दावा है कि इन गतिविधियों का उद्देश्य:

  • कंपनी की बाजार में बनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना,
  • ग्राहकों और व्यापारिक साझेदारों के बीच भ्रम पैदा करना,
  • और आर्थिक दबाव बनाकर धन उगाही करना था।

कंपनी के मुताबिक इस कथित षड्यंत्र के कारण लगभग 1.5 करोड़ रुपये तक के आर्थिक नुकसान की आशंका उत्पन्न हुई है। साथ ही कंपनी की कारोबारी साख पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

पुलिस ने शुरू की डिजिटल जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

अधिकारियों के अनुसार:

  • सोशल मीडिया पोस्ट,
  • इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड,
  • डिजिटल साक्ष्य,
  • और अन्य दस्तावेजों

की तकनीकी जांच की जा रही है।

पुलिस का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

कारोबारी जगत में चर्चा का विषय बना मामला

कंपनी प्रशासन ने पूरे मामले की निष्पक्ष और कठोर जांच की मांग की है। कंपनी का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं न केवल किसी संस्थान की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि कॉरपोरेट जगत में विश्वास और व्यावसायिक माहौल को भी प्रभावित करती हैं।

वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

सोशल मीडिया और कॉरपोरेट प्रतिष्ठा पर फिर उठे सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल और सोशल मीडिया के दौर में किसी भी कंपनी की साख कुछ ही समय में प्रभावित हो सकती है। ऐसे में:

  • गलत सूचनाओं,
  • फर्जी प्रचार,
  • और डिजिटल दुष्प्रचार

से निपटने के लिए कंपनियों और जांच एजेंसियों दोनों को सतर्क रहना होगा।

यह मामला अब कारोबारी जगत में सोशल मीडिया के दुरुपयोग और कॉरपोरेट प्रतिष्ठा की सुरक्षा को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।

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