उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद में लगातार बढ़ रही वनाग्नि की घटनाओं के बीच वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जंगल में आग लगाने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। खास बात यह रही कि आरोपी की पूरी करतूत ड्रोन कैमरे में कैद हो गई, जिसके बाद विभाग ने तकनीक की मदद से उसकी पहचान कर उसे दबोच लिया।
इस कार्रवाई को वन विभाग की बड़ी सफलता माना जा रहा है और इसे जंगलों में आग लगाने वालों के लिए कड़ा संदेश भी बताया जा रहा है।
ड्रोन कैमरे में कैद हुई पूरी घटना
घटना जिले की जखोली रेंज अंतर्गत तैला कक्ष संख्या-07 की बताई जा रही है।
वन विभाग के अनुसार:
- 20 मई 2026 की शाम करीब 7:15 बजे
- ड्रोन के जरिए वन क्षेत्रों की निगरानी की जा रही थी
- उसी दौरान एक व्यक्ति जंगल में आग लगाता दिखाई दिया
जैसे ही कंट्रोल टीम ने यह दृश्य देखा, तुरंत अधिकारियों को सूचना दी गई।
रातभर चला सर्च ऑपरेशन
सूचना मिलते ही:
- वन दरोगा बड़मा अनुभाग
- बीट अधिकारी तैला
- वन विभाग की टीम
मौके पर पहुंच गई।
हालांकि अंधेरे और जंगल का फायदा उठाकर आरोपी वहां से फरार हो गया। इसके बावजूद विभाग ने पूरी रात जंगल और आसपास के इलाकों में सर्च अभियान चलाया।
वन विभाग को रात में सफलता नहीं मिली, लेकिन अगले दिन फिर से जांच शुरू की गई।
ड्रोन फुटेज से हुई आरोपी की पहचान
21 मई को वन विभाग ने दोबारा घटनास्थल का निरीक्षण किया।
जांच के दौरान:
- स्थानीय ग्रामीणों से पूछताछ की गई
- ड्रोन फुटेज का विश्लेषण किया गया
- संदिग्ध व्यक्ति की पहचान की गई
जांच में पता चला कि आरोपी ग्राम एवं पोस्ट पंद्रोला कुमड़ी, तहसील जखोली का रहने वाला है।

पूछताछ में कबूला जुर्म
वन विभाग ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें उसने जंगल में आग लगाने की बात स्वीकार कर ली।
इसके बाद आरोपी को विधिक प्रक्रिया के तहत गिरफ्तार कर लिया गया।
अधिकारियों के अनुसार आरोपी के खिलाफ:
- भारतीय वन अधिनियम 1927 (संशोधित 2001)
- धारा 26(ख)
- धारा 26(ग)
के तहत वन अपराध दर्ज किया गया है।
इन धाराओं के तहत:
- आर्थिक दंड
- अधिकतम दो वर्ष तक कारावास
का प्रावधान है।
अदालत में पेश करने की तैयारी
वन विभाग अब आरोपी को न्यायालय में पेश करने की तैयारी कर रहा है।
अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि:
- जंगलों में आग लगाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी
- ड्रोन और आधुनिक तकनीक से लगातार निगरानी की जा रही है
- भविष्य में भी दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा
उत्तराखंड में हर साल बड़ी समस्या बनती है वनाग्नि
उत्तराखंड में गर्मियों के दौरान जंगलों में आग लगने की घटनाएं लगातार बढ़ जाती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार वनाग्नि से:
- लाखों पेड़-पौधे नष्ट होते हैं
- वन्यजीव प्रभावित होते हैं
- पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचता है
- जल स्रोतों पर असर पड़ता है
कई मामलों में आग मानवीय लापरवाही या जानबूझकर लगाई जाती है।
वन संरक्षण में कारगर साबित हो रही तकनीक
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक तकनीक अब वन संरक्षण में बेहद मददगार साबित हो रही है।
ड्रोन निगरानी से:
- दुर्गम इलाकों पर नजर रखना आसान हुआ
- आग लगने की घटनाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया संभव हुई
- दोषियों की पहचान तेजी से हो पा रही है
स्थानीय लोगों ने की कार्रवाई की सराहना
स्थानीय लोगों ने वन विभाग की इस कार्रवाई का स्वागत किया है।
उनका कहना है कि:
- जंगलों में आग लगाने वालों के खिलाफ सख्त कदम जरूरी हैं
- वन संपदा पर्यावरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है
- आने वाली पीढ़ियों के लिए जंगलों को बचाना जरूरी है
लोगों से की गई अपील
वन विभाग ने आम जनता से अपील की है कि:
- जंगल में आग लगने की सूचना तुरंत दें
- वन क्षेत्रों में लापरवाही न बरतें
- पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करें
विभाग का कहना है कि जंगलों और पर्यावरण की सुरक्षा प्रशासन और जनता दोनों की साझा जिम्मेदारी है।









