पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और बढ़ते तनाव का असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। खासतौर पर कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है और कई देशों को ऊर्जा संकट का डर सता रहा है। हालांकि भारत सरकार ने साफ किया है कि देश में फिलहाल पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है और आम लोगों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
भारत में 60 दिनों का पेट्रोल-डीजल और गैस स्टॉक उपलब्ध
सरकार के अनुसार देश में इस समय करीब 60 दिनों का पेट्रोल और डीजल भंडार उपलब्ध है। इसके अलावा लगभग 60 दिनों का प्राकृतिक गैस भंडार और 45 दिनों का एलपीजी यानी रसोई गैस स्टॉक भी सुरक्षित रखा गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि फ्यूल सप्लाई की राशनिंग करने की कोई योजना नहीं है और घरेलू उपभोक्ताओं को नियमित रूप से गैस और ईंधन की आपूर्ति जारी रहेगी।
पश्चिम एशिया वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा केंद्र
दरअसल, पश्चिम एशिया दुनिया में तेल उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। Iran, Iraq, Saudi Arabia और खाड़ी के अन्य देशों से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का निर्यात होता है। मौजूदा युद्ध और तनाव के कारण समुद्री मार्गों तथा तेल आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। इसी वजह से दुनियाभर के कई देशों ने अपने ऊर्जा भंडार को सुरक्षित रखने की रणनीति शुरू कर दी है।
वैकल्पिक देशों से बढ़ाई गई तेल और गैस खरीद
भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयातित कच्चे तेल पर निर्भर है। ऐसे में पश्चिम एशिया में किसी भी प्रकार का संकट भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर असर डाल सकता है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि उसने पहले से तैयारी कर रखी है और कई वैकल्पिक देशों से तेल और गैस की खरीद बढ़ाई गई है, ताकि सप्लाई प्रभावित न हो।
ऊर्जा मंत्रालय ने कहा- स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में
तेल और गैस मंत्रालय में सचिव Neeraj Mittal ने कहा कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। उन्होंने बताया कि युद्ध जैसी परिस्थितियों के बावजूद देश में लगभग 60 दिनों का पेट्रोल और डीजल स्टॉक सुरक्षित रखा गया है। साथ ही करीब 45 दिनों का एलपीजी भंडार भी लगातार मेंटेन किया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि घरेलू गैस उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
सप्लाई चेन मजबूत करने पर सरकार का फोकस
नीरज मित्तल ने यह भी कहा कि सरकार लगातार वैश्विक हालातों पर नजर बनाए हुए है। विभिन्न देशों से ऊर्जा आयात बढ़ाकर सप्लाई चेन को मजबूत किया गया है। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को भी आवश्यक निर्देश दिए गए हैं कि वे भंडारण क्षमता और वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाए रखें।
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका बरकरार
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। इसका असर भारत में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों पर भी पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल सरकार का फोकस सप्लाई को स्थिर बनाए रखने और बाजार में घबराहट रोकने पर है।
रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार मजबूत करने पर लगातार काम
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार भारत पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को मजबूत करने पर लगातार काम कर रहा है। यही कारण है कि वैश्विक संकट के बावजूद देश के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। इसके अलावा Russia, United States और अन्य देशों से भी ऊर्जा आयात के विकल्प बढ़ाए गए हैं, जिससे किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो सके।
अफवाहों से बचने की सरकार की अपील
सरकार की ओर से यह भी अपील की गई है कि लोग अफवाहों पर ध्यान न दें और अनावश्यक रूप से ईंधन या गैस का स्टॉक जमा न करें। अधिकारियों का कहना है कि देश में पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और सप्लाई सामान्य रूप से जारी रहेगी।
वैश्विक हालातों पर लगातार नजर बनाए हुए है भारत
फिलहाल पश्चिम एशिया के हालातों पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। भारत सरकार भी लगातार स्थिति की समीक्षा कर रही है ताकि किसी भी संभावित संकट का समय रहते सामना किया जा सके और आम जनता को किसी तरह की परेशानी न हो।







