हाल ही में सार्वजनिक हुए अमेरिकी फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) के रिकॉर्ड्स में यह सामने आया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान और उसके बाद पाकिस्तान ने अमेरिका में सीजफायर के लिए व्यापक लॉबिंग प्रयास किए। रिकॉर्ड्स के अनुसार, इस्लामाबाद के प्रतिनिधियों ने अमेरिकी सांसदों, स्टेट डिपार्टमेंट, पेंटागन और मीडिया से संपर्क की कोशिशें तेज कीं।
60 से अधिक संपर्क प्रयासों का दावा
FARA में दर्ज दस्तावेजों के मुताबिक:
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पाकिस्तानी डिप्लोमैट्स और डिफेंस अटाशे ने
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ईमेल, फोन कॉल्स और आमने-सामने की मीटिंग्स के जरिए
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60 से अधिक संपर्क प्रयास किए।
इन प्रयासों का उद्देश्य कथित तौर पर युद्धविराम, क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक हस्तक्षेप पर चर्चा करना था।
किन-किन से संपर्क किया गया
रिकॉर्ड्स में जिन संस्थानों/हितधारकों से संपर्क का जिक्र है, उनमें शामिल हैं:
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अमेरिकी सांसद
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स्टेट डिपार्टमेंट
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पेंटागन
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प्रमुख मीडिया संस्थान और जर्नलिस्ट्स
बताया जाता है कि कश्मीर, क्षेत्रीय सुरक्षा, दुर्लभ खनिज (रेयर मिनरल्स) और पाक-अमेरिका संबंध जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रहे।
मीडिया आउटरीच और बैकग्राउंड ब्रीफिंग
दस्तावेजों के अनुसार पाकिस्तानी प्रतिनिधियों ने:
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कई बड़े मीडिया संगठनों को इंटरव्यू देने की कोशिश की
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बैकग्राउंड ब्रीफिंग्स आयोजित कीं
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ताकि अंतरराष्ट्रीय जनमत को प्रभावित किया जा सके।
ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में दावे
भारतीय पक्ष के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के तहत:
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11 एयरबेस को नुकसान पहुंचाने
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और 9 आतंकी ठिकानों को नष्ट करने
के दावे किए गए हैं। कुछ रिपोर्ट्स में सैटेलाइट इमेजरी के आधार पर क्षति की पुष्टि का उल्लेख भी हुआ है। (ये विवरण विभिन्न सार्वजनिक रिपोर्ट्स/बयानों पर आधारित हैं।)
पहले भी लॉबिंग एजेंसियों का जिक्र
नवंबर 2025 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के हवाले से यह भी कहा गया था कि पाकिस्तान ने अमेरिका में कई लॉबिंग एजेंसियां नियुक्त की थीं और इसके लिए मिलियन-डॉलर डील्स हुई थीं। कुछ रिपोर्ट्स में जेवलिन एडवाइजर्स जैसी फर्मों का नाम भी सामने आया था। (ये विवरण मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित बताए जाते हैं।)
कूटनीतिक गतिविधियों पर सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि:
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FARA रिकॉर्ड्स में दर्ज संपर्क प्रयास
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ऑपरेशन के बाद की कूटनीतिक सक्रियता
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और मीडिया आउटरीच
यह संकेत देते हैं कि पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर तेज कूटनीतिक पहल की।
आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
हालांकि, इन दस्तावेजों पर पाकिस्तान सरकार की ओर से औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। अमेरिकी एजेंसियों ने भी इन रिकॉर्ड्स को रूटीन फाइलिंग बताया है, जिनमें पंजीकरण और संपर्क विवरण दर्ज होते हैं।
रणनीतिक परिदृश्य में नया अध्याय
इन खुलासों से दक्षिण एशिया की रणनीतिक स्थिति, भारत-पाक संबंध और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर नई बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और स्पष्टीकरण सामने आ सकते हैं।










