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एफएटीएफ की नेपाल को कड़ी चेतावनी, वित्तीय अपराधों पर कार्रवाई नहीं हुई तो ब्लैक लिस्ट होने का खतरा

BPC News National Desk
4 Min Read

Nepal पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक दबाव बढ़ता नजर आ रहा है। मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी फंडिंग पर नजर रखने वाली वैश्विक संस्था Financial Action Task Force ने नेपाल को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उसने वित्तीय अपराधों और अवैध फंडिंग पर रोक लगाने के लिए ठोस सुधार नहीं किए, तो उसे ब्लैक लिस्ट में डाला जा सकता है।

यह चेतावनी FATF की क्षेत्रीय इकाई Asia/Pacific Group on Money Laundering की ओर से दी गई है।

नेपाल के लिए क्यों गंभीर है यह स्थिति?

नेपाल के लिए यह स्थिति बेहद गंभीर मानी जा रही है, क्योंकि ब्लैक लिस्ट में शामिल होने का असर सीधे उसकी अर्थव्यवस्था, विदेशी निवेश और अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग संबंधों पर पड़ सकता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार नेपाल सरकार के पास सुधारों को लागू करने और प्रभावी नतीजे दिखाने के लिए अब लगभग चार महीने का समय बचा है। सितंबर 2026 में होने वाली निर्णायक समीक्षा से पहले APG ने इसे “अंतिम उच्च-स्तरीय हस्तक्षेप” बताया है।

काठमांडू में मौजूद है APG प्रतिनिधिमंडल

रिपोर्ट के मुताबिक APG का प्रतिनिधिमंडल इन दिनों Kathmandu में मौजूद है और नेपाल की तैयारियों का आकलन कर रहा है।

इस प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई David Shannon कर रहे हैं। डेविड शैनन वर्ष 2002 से APG सचिवालय से जुड़े हुए हैं और वर्तमान में अपना 24वां “म्यूचुअल इवैल्यूएशन” कर रहे हैं।

उनकी मौजूदगी को यह संकेत माना जा रहा है कि FATF और APG नेपाल के मामले को बेहद गंभीरता से देख रहे हैं।

ब्लैक लिस्ट होने पर क्या होगा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नेपाल ब्लैक लिस्ट में शामिल होता है तो उसका अंतरराष्ट्रीय वित्तीय तंत्र बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।

विदेशी बैंक नेपाल के साथ लेनदेन में सख्ती बरत सकते हैं, अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ सकता है और विदेशी सहायता प्राप्त करने में भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

इसके अलावा विदेशी व्यापार और रेमिटेंस पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

FATF कैसे करता है देशों का मूल्यांकन?

Financial Action Task Force उन देशों पर विशेष नजर रखता है जहां मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवादी फंडिंग और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन को रोकने के लिए पर्याप्त कानूनी और संस्थागत व्यवस्था नहीं होती।

संस्था समय-समय पर देशों का मूल्यांकन करती है और कमियों के आधार पर उन्हें ग्रे लिस्ट या ब्लैक लिस्ट में डालती है। ब्लैक लिस्ट में शामिल देशों को वैश्विक वित्तीय प्रणाली में गंभीर प्रतिबंधों और निगरानी का सामना करना पड़ता है।

नेपाल के सामने बड़ी चुनौती

नेपाल पहले से ही वित्तीय पारदर्शिता और नियामक ढांचे को मजबूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव में रहा है।

हालांकि सरकार ने कुछ सुधारात्मक कदम उठाने का दावा किया है, लेकिन APG का मानना है कि अब तक अपेक्षित स्तर की प्रगति दिखाई नहीं दी है। यही वजह है कि सितंबर में होने वाली समीक्षा नेपाल के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।

कम समय में दिखाने होंगे ठोस परिणाम

नेपाल सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह कम समय में प्रभावी कानून लागू करे, संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों पर कार्रवाई तेज करे और आतंकवादी फंडिंग से जुड़े मामलों में ठोस परिणाम प्रस्तुत करे।

यदि आने वाले महीनों में स्थिति में सुधार नहीं दिखा, तो नेपाल को अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंच पर बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

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