नोएडा में हाल ही में हुए श्रमिक आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उत्तर प्रदेश पुलिस की थाना फेस-2 टीम ने हिमांशु ठाकुर और सत्यम वर्मा को हिरासत में लिया है। दोनों पर प्रदर्शन के दौरान भीड़ को उकसाने और हिंसा भड़काने का आरोप है।
इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से मिली बड़ी सफलता
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस से मिले अहम सुरागों के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई।
जांच में शामिल प्रमुख तकनीकी पहलू:
- कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) का विश्लेषण
- सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच
- लोकेशन ट्रैकिंग
इन सभी के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि दोनों आरोपी हिंसा के दौरान मौके पर मौजूद थे और उन्होंने भीड़ को भड़काने में सक्रिय भूमिका निभाई।
मास्टरमाइंड से जुड़े तार
जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों आरोपी इस पूरे घटनाक्रम के कथित मास्टरमाइंड आदित्य आनंद से जुड़े हुए थे। पुलिस को शक है कि आंदोलन को सुनियोजित तरीके से हिंसक बनाने के लिए एक नेटवर्क तैयार किया गया था।
- हिमांशु ठाकुर और सत्यम वर्मा इसी नेटवर्क का हिस्सा थे
- इनके जरिए भीड़ को संगठित किया गया
- प्रदर्शन को उग्र रूप दिया गया

पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां
इस मामले में पुलिस पहले ही:
- रूपेश रॉय
- मनीषा चौहान
को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। अब नई गिरफ्तारी को इस केस में अहम कड़ी माना जा रहा है, जिससे पूरे नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है।
पुलिस का सख्त रुख
पुलिस का कहना है कि इस मामले में किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।
- इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की गहन जांच जारी
- अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही
- आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव
हिंसा से बिगड़ी थी कानून व्यवस्था
श्रमिक आंदोलन के दौरान हुई हिंसा ने शहर की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। इस दौरान:
- तोड़फोड़
- आगजनी
- पुलिस पर हमले
जैसी घटनाएं सामने आई थीं, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ।
आगे की कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है और उनसे पूछताछ जारी है। साथ ही, अन्य संदिग्धों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
नोएडा पुलिस की यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन का उद्देश्य न केवल दोषियों को सजा दिलाना है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकना भी है।









