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विश्व हिन्दू परिषद् के विराट संत सम्मेलन से हिन्दू समाज की एकजूटता का संदेश

BPC News National Desk
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प्रयागराज संवाददाता

विश्व हिन्दू परिषद् के विराट संत सम्मेलन से हिन्दू समाज की एकजूटता का संदेश

विश्व हिंदू परिषद महाकुंभ शिविर में विराट संत सम्मेलन का आयोजन हुआ। जिसमें देश के कोने-कोने से सभी मत, पंथ, संप्रदाय के हजारों धर्माचार्य, मार्गदर्शक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। दीप प्रज्वलन के समय पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी, लिंग रिंपोचे, पुज्य भास्कर गिरि जी, पूज्य स्वामी जनार्दन जी, पूज्य मैत्रेय जी, पूज्य परमानंद गिरि जी आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूज्य जगतगुरु शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती जी ने किया ।

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प्रयागराज संवाददाताविश्व हिन्दू परिषद् के विराट संत सम्मेलन से हिन्दू समाज की एकजूटता का संदेशविश्व हिंदू परिषद महाकुंभ शिविर में विराट संत सम्मेलन का आयोजन हुआ। जिसमें देश के कोने-कोने से सभी मत, पंथ, संप्रदाय के हजारों धर्माचार्य, मार्गदर्शक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। दीप प्रज्वलन के समय पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी, लिंग रिंपोचे, पुज्य भास्कर गिरि जी, पूज्य स्वामी जनार्दन जी, पूज्य मैत्रेय जी, पूज्य परमानंद गिरि जी आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूज्य जगतगुरु शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती जी ने किया ।इसके उपरांत कल हुई विश्व हिंदू परिषद महाकुंभ शिविर में आयोजित केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक में पूज्य संतों द्वारा हिंदू समाज के मार्गदर्शन के विषय में जो विचार आए, उन विषयों की चर्चा करते हुए विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय महामंत्री बजरंग लाल बंगड़ा जी ने कहा कि संत सम्मेलन में मार्गदर्शक मंडल में पूज्य संतों द्वारा दुनिया भर के हिंदू समाज का मार्गदर्शन जिन विषयों पर किया गया है वह विषय देश भर में हिंदू मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्ति, हिंदुओं की घटती जन्म दर से देश में हिंदू जनसंख्या का असंतुलन, हर हिंदू परिवार में कम से कम तीन बच्चों का जन्म हो ऐसा आह्वान हिंदू समाज के पूज्य संतों ने किया है। मार्गदर्शक मंडल की बैठक में बांग्लादेश में हिंदुओं पर लगातार सुनियोजित अत्याचार हो रहा है।भारत में भी कुछ तत्व हिंदुओं को बांग्लादेश जैसी स्थिति उत्पन्न करने की धमकी दे रहे हैं। देश में हिंदुओं को इस विषय पर गहन चिंतन करना चाहिए। वक्फ बोर्ड के निरंकुश व असीमित अधिकारों को सीमित करने के लिए केंद्र सरकार कानून सुधार अधिनियम ला रही हैं। इस पर सभी दलों के सांसदों का सहयोग होना चाहिए। सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण जैसे अनेक विषयों के संदर्भ में मार्गदर्शक मंडल की बैठक में चर्चा हुई थी ।प्रभाकर दास जी महाराज – उड़ीसा ने अपने संबोधन में हिंदू समाज की एकता पर बल दिया,वही वाल्मीकि समाज से योगी उमेश नाथ जी महाराज ने अपने संबोधन में हिंदू समाज में घटती जनसंख्या के संबंध में बताया और यह निवेदन किया कि कि हिंदू समाज अपनी जनसंख्या को बढ़ाएं । कार्यक्रम में उपस्थित गोरक्ष पीठाधीश्वर माननीय मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ जी ने कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि भारत की सनातन परंपरा इस महाकुंभ नगर में दिख रही है जो पूरी दुनिया देख रही है। यह संदेश पूरे देश के लिए दिव्य होना चाहिए जिसके लिए विश्व हिंदू परिषद का प्रयास अतुलनीय है।इस प्रयास का प्रतिफल आज इस विराट संत सम्मेलन के माध्यम से पूरी दुनिया देख रही है। जहां सभी मत पंथ संप्रदाय के धर्माचार्य एक साथ एक मंच पर विराजमान है। 1980 के बाद विश्व हिंदू परिषद ने अपने सभी अनेक संकल्प इसी पवित्र भूमि मां गंगा जमुना सरस्वती के पावन तट पर लिया है जो आज हमें मूर्त रूप में दिख रहा है। हम श्रद्धेय अशोक सिंघल जी को जो आज हम सबके बीच भौतिक रूप से उपस्थित नहीं है पर उनकी आत्मा यह देखकर प्रफुल्लित हो रही होगी। सनातन धर्म 500 वर्षों से जिस दृश्य के लिए प्रतीक्षारत था वह सपना भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की जन्मस्थली पर दिव्य और भव्य रूप में रामलाल विराजमान है।जहां वर्ष 2016 में दो लाख लोग दर्शन करते थे वहीं वर्ष 2024 में 15 करोड लोग दर्शन कर रहे हैं। एक नई अयोध्या, एक नई काशी का भव्य और दिव्य रूप दिख रहा है। कुंभ का दर्शन, अविरल गंगा का दर्शन हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सनातन रहेगा, तो धर्म रहेगा, उपासना रहेगी और संत रहेंगे। तभी मठ और मंदिर भी सुरक्षित रहेगे। यह भारत की सदी है।संतो को देश की दिशा और दशा तय करनी है। उन्होंने अनेक बार पूज्य अशोक सिंघल जी का नाम लिया और इस पवित्र भूमि पर उनके द्वारा पूज्य संतों के साथ अनेक रणनीतियों को तय करने जैसे विषयों को ध्यान करते हुए उन्होंने कहा कि सिंघल जी सामान्य दिनों में भी देश के ही नहीं दुनिया के संतों को एकजुट करने के प्रयास में लगे रहते थे।यह ध्यान करते हुए उन्होंने कहा कि आज अशोक सिंघल जी, अवैद्यनाथ जी, परमहंस दास जी, को विनम्र श्रद्धांजलि दी। साथ ही इशारों – इशारों में यह भी कहा कि संतो को धैर्य से कार्य करते हुए बांटने वाली ताकतों से सावधान रहना चाहिए। श्रीराम जन्मभूमि के बाद अब मथुरा और काशी का सपना साकार होने वाला है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि यह वही पुण्यभुमि है जहां हिन्दू समाज के विषय में अनेक निर्णय इसी गंगा यमुना सरस्वती के पावन तट पर पूज्य संन्तो ने लिया है इस मंच पर सभी सम्प्रदायों के धर्माचार्य एक साथ विराजमान होकर सनातन की एकता का संदेश पूरी दुनिया को दे रहे है।कार्यक्रम में महाराज जगद्गुरु रामानुजाचार्य, स्वामी वासुदेवाचार्य जी, महाराज युगपुरुष स्वामी परमानंद गिरि जी, पूजनीय आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरी जी, महाराज पूज्य भास्कर किशन गिरी जी, सगाधिकार जनार्दन देव गोस्वामी जी, भंते रिंगपोचे, जैन साध्वी दीप्ति जी, पूज्य स्वामी विवेकानंद जी, के साथ विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय अध्यक्ष आलोक जी, केंद्रीय महामंत्री संगठन मिलिंद परांडे जी, केंद्रीय महामंत्री सह-संगठन मंत्री विनायक राव देशपांडे जी,केंद्रीय संयुक्त महामंत्री कोटेश्वर शर्मा जी, नेपाल से पधारे पूज्य स्वामी चूड़ामणि चतुभुजाचार्य जी, प्रभाकर दास जी, श्रीलंका, कोरिया, वर्मा, तथा तिब्बत के बौद्ध, संत, लामा, पूज्य रविदास जन्मस्थान श्री महंत डॉ भरत भूषण दास जी, जत्थेदार हरजोत सिंह जी, निहंग भानपुरा शंकराचार्य ज्ञानानंद तीर्थ जी, विश्व जागृति मिशन के संस्थापक सुधांशु जी महाराज, नाथ संप्रदाय से जितेन नाथ जी, संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंन्द सरस्वती जी, त्रिपुरा से चित महाराज, गहरा- गुरु परंपरा से आचार्य स्वामी बब्रुवाहन जी महाराज ने अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का संचालन केंद्रीय संत संपर्क प्रमुख अशोक तिवारी जी ने किया ।

इसके उपरांत कल हुई विश्व हिंदू परिषद महाकुंभ शिविर में आयोजित केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक में पूज्य संतों द्वारा हिंदू समाज के मार्गदर्शन के विषय में जो विचार आए, उन विषयों की चर्चा करते हुए विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय महामंत्री बजरंग लाल बंगड़ा जी ने कहा कि संत सम्मेलन में मार्गदर्शक मंडल में पूज्य संतों द्वारा दुनिया भर के हिंदू समाज का मार्गदर्शन जिन विषयों पर किया गया है वह विषय देश भर में हिंदू मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्ति, हिंदुओं की घटती जन्म दर से देश में हिंदू जनसंख्या का असंतुलन, हर हिंदू परिवार में कम से कम तीन बच्चों का जन्म हो ऐसा आह्वान हिंदू समाज के पूज्य संतों ने किया है। मार्गदर्शक मंडल की बैठक में बांग्लादेश में हिंदुओं पर लगातार सुनियोजित अत्याचार हो रहा है।

भारत में भी कुछ तत्व हिंदुओं को बांग्लादेश जैसी स्थिति उत्पन्न करने की धमकी दे रहे हैं। देश में हिंदुओं को इस विषय पर गहन चिंतन करना चाहिए। वक्फ बोर्ड के निरंकुश व असीमित अधिकारों को सीमित करने के लिए केंद्र सरकार कानून सुधार अधिनियम ला रही हैं। इस पर सभी दलों के सांसदों का सहयोग होना चाहिए। सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण जैसे अनेक विषयों के संदर्भ में मार्गदर्शक मंडल की बैठक में चर्चा हुई थी ।

प्रभाकर दास जी महाराज – उड़ीसा ने अपने संबोधन में हिंदू समाज की एकता पर बल दिया,वही वाल्मीकि समाज से योगी उमेश नाथ जी महाराज ने अपने संबोधन में हिंदू समाज में घटती जनसंख्या के संबंध में बताया और यह निवेदन किया कि कि हिंदू समाज अपनी जनसंख्या को बढ़ाएं । कार्यक्रम में उपस्थित गोरक्ष पीठाधीश्वर माननीय मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ जी ने कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि भारत की सनातन परंपरा इस महाकुंभ नगर में दिख रही है जो पूरी दुनिया देख रही है। यह संदेश पूरे देश के लिए दिव्य होना चाहिए जिसके लिए विश्व हिंदू परिषद का प्रयास अतुलनीय है।

इस प्रयास का प्रतिफल आज इस विराट संत सम्मेलन के माध्यम से पूरी दुनिया देख रही है। जहां सभी मत पंथ संप्रदाय के धर्माचार्य एक साथ एक मंच पर विराजमान है। 1980 के बाद विश्व हिंदू परिषद ने अपने सभी अनेक संकल्प इसी पवित्र भूमि मां गंगा जमुना सरस्वती के पावन तट पर लिया है जो आज हमें मूर्त रूप में दिख रहा है। हम श्रद्धेय अशोक सिंघल जी को जो आज हम सबके बीच भौतिक रूप से उपस्थित नहीं है पर उनकी आत्मा यह देखकर प्रफुल्लित हो रही होगी। सनातन धर्म 500 वर्षों से जिस दृश्य के लिए प्रतीक्षारत था वह सपना भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की जन्मस्थली पर दिव्य और भव्य रूप में रामलाल विराजमान है।

जहां वर्ष 2016 में दो लाख लोग दर्शन करते थे वहीं वर्ष 2024 में 15 करोड लोग दर्शन कर रहे हैं। एक नई अयोध्या, एक नई काशी का भव्य और दिव्य रूप दिख रहा है। कुंभ का दर्शन, अविरल गंगा का दर्शन हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सनातन रहेगा, तो धर्म रहेगा, उपासना रहेगी और संत रहेंगे। तभी मठ और मंदिर भी सुरक्षित रहेगे। यह भारत की सदी है।

संतो को देश की दिशा और दशा तय करनी है। उन्होंने अनेक बार पूज्य अशोक सिंघल जी का नाम लिया और इस पवित्र भूमि पर उनके द्वारा पूज्य संतों के साथ अनेक रणनीतियों को तय करने जैसे विषयों को ध्यान करते हुए उन्होंने कहा कि सिंघल जी सामान्य दिनों में भी देश के ही नहीं दुनिया के संतों को एकजुट करने के प्रयास में लगे रहते थे।

यह ध्यान करते हुए उन्होंने कहा कि आज अशोक सिंघल जी, अवैद्यनाथ जी, परमहंस दास जी, को विनम्र श्रद्धांजलि दी। साथ ही इशारों – इशारों में यह भी कहा कि संतो को धैर्य से कार्य करते हुए बांटने वाली ताकतों से सावधान रहना चाहिए। श्रीराम जन्मभूमि के बाद अब मथुरा और काशी का सपना साकार होने वाला है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि यह वही पुण्यभुमि है जहां हिन्दू समाज के विषय में अनेक निर्णय इसी गंगा यमुना सरस्वती के पावन तट पर पूज्य संन्तो ने लिया है इस मंच पर सभी सम्प्रदायों के धर्माचार्य एक साथ विराजमान होकर सनातन की एकता का संदेश पूरी दुनिया को दे रहे है।

कार्यक्रम में महाराज जगद्गुरु रामानुजाचार्य, स्वामी वासुदेवाचार्य जी, महाराज युगपुरुष स्वामी परमानंद गिरि जी, पूजनीय आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरी जी, महाराज पूज्य भास्कर किशन गिरी जी, सगाधिकार जनार्दन देव गोस्वामी जी, भंते रिंगपोचे, जैन साध्वी दीप्ति जी, पूज्य स्वामी विवेकानंद जी, के साथ विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय अध्यक्ष आलोक जी, केंद्रीय महामंत्री संगठन मिलिंद परांडे जी, केंद्रीय महामंत्री सह-संगठन मंत्री विनायक राव देशपांडे जी,

केंद्रीय संयुक्त महामंत्री कोटेश्वर शर्मा जी, नेपाल से पधारे पूज्य स्वामी चूड़ामणि चतुभुजाचार्य जी, प्रभाकर दास जी, श्रीलंका, कोरिया, वर्मा, तथा तिब्बत के बौद्ध, संत, लामा, पूज्य रविदास जन्मस्थान श्री महंत डॉ भरत भूषण दास जी, जत्थेदार हरजोत सिंह जी, निहंग भानपुरा शंकराचार्य ज्ञानानंद तीर्थ जी, विश्व जागृति मिशन के संस्थापक सुधांशु जी महाराज, नाथ संप्रदाय से जितेन नाथ जी, संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंन्द सरस्वती जी, त्रिपुरा से चित महाराज, गहरा- गुरु परंपरा से आचार्य स्वामी बब्रुवाहन जी महाराज ने अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का संचालन केंद्रीय संत संपर्क प्रमुख अशोक तिवारी जी ने किया ।

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