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अफ्रीका की ईवी क्रांति को नई रफ्तार: भारतीय उद्यमी गगन गुप्ता की स्पाइरो ने जुटाए 215 मिलियन डॉलर

BPC News National Desk
6 Min Read

देहरादून, भारतीय उद्यमी गगन गुप्ता द्वारा स्थापित अफ्रीकी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी कंपनी स्पाइरो ने 215 मिलियन डॉलर के बड़े निवेश राउंड की घोषणा कर वैश्विक ईवी उद्योग में अपनी मजबूत स्थिति का संकेत दिया है। यह निवेश कंपनी को अफ्रीका में अपने इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी-स्वैपिंग नेटवर्क का तेजी से विस्तार करने में मदद करेगा। खास बात यह है कि इस विस्तार की तकनीकी और इंजीनियरिंग अगुवाई भारत के पुणे स्थित स्पाइरो के ग्लोबल टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग सेंटर से की जाएगी।

यह निवेश ऐसे समय में आया है जब अफ्रीका में स्वच्छ ऊर्जा, टिकाऊ परिवहन और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। यूरोप और अफ्रीका के प्रमुख निवेशकों द्वारा किए गए इस निवेश को उभरते बाजारों में इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित हरित परियोजनाओं पर बढ़ते भरोसे का प्रतीक माना जा रहा है।

अफ्रीका की सबसे बड़ी ई-मोबिलिटी कंपनी बनी स्पाइरो

इक्विटेन ग्रुप के तहत स्थापित स्पाइरो ने पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय विकास किया है। आज कंपनी अफ्रीका की सबसे बड़ी ई-मोबिलिटी कंपनी के रूप में उभर चुकी है। वर्तमान में स्पाइरो केन्या, रवांडा, युगांडा, टोगो, बेनिन, नाइजीरिया और कैमरून सहित सात प्रमुख अफ्रीकी देशों में कार्यरत है।

कंपनी के पास 1 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलों का बेड़ा और 2,500 से अधिक ऑटोमेटेड बैटरी-स्वैपिंग स्टेशनों का नेटवर्क है। यह नेटवर्क लाखों लोगों को किफायती और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

पुणे बनेगा वैश्विक नवाचार का केंद्र

स्पाइरो के विस्तार की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी भारत का पुणे शहर है, जहां कंपनी का ग्लोबल टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन सेंटर स्थित है। यहां 150 से अधिक इंजीनियर कार्यरत हैं और कंपनी के पास 30 से अधिक मालिकाना पेटेंट मौजूद हैं।

यहीं से विकसित की गई अत्याधुनिक तकनीकें अफ्रीकी बाजारों में लागू की जा रही हैं। आईओटी आधारित बैटरी-स्वैपिंग सिस्टम, सौर ऊर्जा संचालित स्वैप स्टेशन और सेकेंडरी-लाइफ बैटरी स्टोरेज जैसी तकनीकों के जरिए कंपनी केवल परिवहन नहीं बल्कि स्वच्छ ऊर्जा नेटवर्क भी विकसित कर रही है।

निवेशकों को दिख रहा है अफ्रीका का उज्ज्वल भविष्य

विशेषज्ञों का मानना है कि अफ्रीका आने वाले वर्षों में दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ने वाले मोबिलिटी बाजारों में शामिल होगा। तेजी से बढ़ती शहरी आबादी, महंगे आयातित ईंधन और स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ती जरूरत ने इलेक्ट्रिक वाहनों को एक व्यवहारिक विकल्प बना दिया है।

इसी संभावना को देखते हुए वैश्विक निवेशक अब बड़े पैमाने पर ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में निवेश कर रहे हैं। स्पाइरो का नया निवेश राउंड इसी बढ़ते विश्वास का परिणाम माना जा रहा है।

राइडर्स को सीधे मिल रहा आर्थिक लाभ

स्पाइरो का मॉडल केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है बल्कि आम लोगों की जेब पर भी सकारात्मक असर डाल रहा है। कंपनी के अनुसार, इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलों के उपयोग से रोजाना परिवहन लागत में लगभग 40 प्रतिशत तक कमी आती है। इससे एक राइडर प्रतिदिन लगभग 2 डॉलर तक की बचत कर सकता है।

अफ्रीकी देशों में जहां दोपहिया वाहन आजीविका का प्रमुख साधन हैं, वहां यह बचत लाखों लोगों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में मदद कर रही है।

पर्यावरण संरक्षण में भी निभा रही अहम भूमिका

केन्या में किए गए एक स्वतंत्र लाइफसाइकिल अध्ययन के अनुसार स्पाइरो की इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलें पारंपरिक पेट्रोल और डीजल वाहनों की तुलना में जलवायु पर पड़ने वाले प्रभाव को 72 प्रतिशत तक कम करती हैं। एक वाहन अपने पूरे जीवनकाल में लगभग 19 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को रोक सकता है।

अध्ययन में ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले प्रभाव में 80 प्रतिशत तथा पार्टिकुलेट मैटर उत्सर्जन में 20 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इससे स्पष्ट है कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी अफ्रीका के तेजी से बढ़ते शहरों में वायु प्रदूषण कम करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुधारने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

नए बाजारों में प्रवेश की तैयारी

स्पाइरो अब अपने अगले विकास चरण की ओर बढ़ रही है। कंपनी डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) और इथियोपिया जैसे नए बाजारों में प्रवेश की योजना बना रही है। साथ ही स्थानीय उत्पादन और विनिर्माण क्षमता को भी बढ़ाया जाएगा।

 

कंपनी के संस्थापक गगन गुप्ता का कहना है कि स्पाइरो ने केवल इलेक्ट्रिक वाहन उपलब्ध कराने तक खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि स्थानीय औद्योगिकीकरण, रोजगार सृजन और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब कंपनी का लक्ष्य पूरे अफ्रीका में लाखों लोगों तक किफायती और टिकाऊ परिवहन पहुंचाना है।

अफ्रीका की हरित अर्थव्यवस्था का नया आधार

215 मिलियन डॉलर का यह निवेश केवल एक कारोबारी उपलब्धि नहीं, बल्कि अफ्रीका की हरित अर्थव्यवस्था और स्वच्छ ऊर्जा भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भारतीय तकनीक, वैश्विक निवेश और अफ्रीकी जरूरतों के इस संगम ने स्पाइरो को महाद्वीप की ईवी क्रांति का प्रमुख चेहरा बना दिया है। आने वाले वर्षों में कंपनी अफ्रीका के परिवहन और ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलाव की वाहक बन सकती है।

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