चमोली। उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है। इसी क्रम में जनपद चमोली की खूबसूरत नीति घाटी में आयोजित ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। 31 मई से 2 जून तक आयोजित इस साहसिक आयोजन के पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्यमंत्री वर्चुअल माध्यम से जुड़े और सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल पर्यटन को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आजीविका को भी मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के सीमावर्ती गांवों में अपार पर्यटन संभावनाएं मौजूद हैं, जिन्हें योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और पलायन की समस्या को कम करने में भी मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि चमोली जिले के नीति, मलारी, कोशा, फरकिया, बाम्पा, गुरगुटी, कैलाशपुर और महरगांव जैसे सीमांत गांवों में सामुदायिक सहभागिता आधारित पर्यटन मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके तहत स्थानीय लोगों को पर्यटन गतिविधियों से सीधे जोड़ने की योजना बनाई गई है। सरकार इन क्षेत्रों में सामुदायिक होम स्टे निर्माण को प्रोत्साहित करेगी ताकि पर्यटक स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली का अनुभव कर सकें।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा। बेहतर सड़क संपर्क, स्वच्छता, पेयजल, विद्युत व्यवस्था और पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर विकसित किया जाएगा। इससे इन गांवों में पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी और स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि होगी।
मुख्यमंत्री धामी ने पर्यटकों की सुविधा के लिए एक और महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि नीति घाटी के विभिन्न गांवों और प्रमुख पर्यटन स्थलों पर आधुनिक साइनेज और व्यू प्वाइंट विकसित किए जाएंगे। इससे पर्यटकों को क्षेत्र की जानकारी आसानी से उपलब्ध होगी और वे प्राकृतिक सौंदर्य का बेहतर अनुभव प्राप्त कर सकेंगे। साथ ही यह पहल क्षेत्र को पर्यटन मानचित्र पर और अधिक प्रभावी ढंग से स्थापित करने में सहायक होगी।
सीमांत क्षेत्रों में बॉर्डर टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने चमोली जिले के रिमखिम और बाड़ाहोती क्षेत्र में ‘सीमा दर्शन केंद्र’ स्थापित करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि सीमा से जुड़े क्षेत्रों के प्रति लोगों की उत्सुकता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सीमा दर्शन केंद्र न केवल पर्यटन को प्रोत्साहित करेंगे, बल्कि लोगों को देश की सीमाओं और वहां तैनात सुरक्षा बलों के महत्व से भी परिचित कराएंगे।
मुख्यमंत्री ने ग्राम गमशाली स्थित दुप्फूधार मैदान के विकास की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि यहां आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जाएगा, जिससे यह क्षेत्र साहसिक पर्यटन और बड़े आयोजनों के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हो सके। दुप्फूधार मैदान में भविष्य में खेल प्रतियोगिताओं, ट्रैकिंग अभियानों, सांस्कृतिक आयोजनों और अन्य पर्यटन गतिविधियों के आयोजन की संभावनाएं बढ़ेंगी।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पर्यटन केवल प्राकृतिक सौंदर्य देखने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह स्थानीय संस्कृति, परंपरा और अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का प्रभावी साधन भी है। सरकार का प्रयास है कि सीमांत गांवों के लोग पर्यटन से सीधे लाभान्वित हों और उन्हें अपने घरों के पास ही रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकें।
मुख्यमंत्री की इन घोषणाओं का स्थानीय लोगों और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों ने स्वागत किया है। उनका मानना है कि इन योजनाओं के धरातल पर उतरने से नीति घाटी और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी। साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्राप्त होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो नीति घाटी उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में अपनी अलग पहचान बना सकती है। मुख्यमंत्री धामी की घोषणाएं सीमांत क्षेत्रों के विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।







