Bpc News Digital

  • अपनी भाषा चुनें

You are Visiters no

818328
हमें फॉलो करें

भाषा चुनें

ऋषिकुल हरिद्वार में प्राच्य शोध संस्थान बनेगा वैश्विक ज्ञान केंद्र, सीएम धामी ने दिए त्वरित कार्यवाही के निर्देश

BPC News National Desk
4 Min Read

देहरादून | उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान के विकास और विस्तार की योजनाओं की समीक्षा की। इस दौरान संस्थान को भारतीय ज्ञान परंपरा, प्राचीन विज्ञान और आधुनिक शोध का वैश्विक केंद्र बनाने पर जोर दिया गया।

कुंभ 2027 से पहले प्रमुख कार्य पूरे करने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि संस्थान के विकास कार्य जल्द शुरू किए जाएं और कुंभ मेला 2027 से पहले प्रमुख परियोजनाओं को पूरा किया जाए।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि ज्ञान और वैज्ञानिक चिंतन की भी भूमि है।

नियमित समीक्षा और विरासत संरक्षण पर जोर

बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु को निर्देश दिए गए कि संस्थान की प्रगति की नियमित समीक्षा के लिए पाक्षिक बैठकें आयोजित की जाएं।

इसके साथ ही विरासत संरक्षण और सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करने पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही गई।

भारतीय ज्ञान परंपरा को मिलेगा वैश्विक मंच

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सभी जनपदों की लोक कला और सांस्कृतिक गतिविधियों को संस्थान से जोड़ा जाएगा।

इससे स्थानीय परंपराओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।

वैदिक विज्ञान और आधुनिक शोध का समन्वय

संस्थान में वैदिक गणित, वेदों में विज्ञान, उपनिषदों का दर्शन, भारतीय तर्कशास्त्र और पर्यावरण विज्ञान पर आधारित शोध को बढ़ावा दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ने विश्व को शून्य, दशमलव, बीजगणित और त्रिकोणमिति जैसे महत्वपूर्ण सिद्धांत दिए हैं, जिन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।

प्राचीन वैज्ञानिक ज्ञान पर विशेष केंद्र

बैठक में खगोल विज्ञान, धातु विज्ञान, कृषि विज्ञान और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर विशेष अध्ययन केंद्र स्थापित करने पर भी चर्चा हुई।

उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत का ज्ञान आधुनिक शोध के साथ जोड़कर नई संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं।

डिजिटल लाइब्रेरी और ई-लर्निंग सुविधाओं पर फोकस

संस्थान में डिजिटल पांडुलिपि संरक्षण केंद्र, आधुनिक पुस्तकालय, शोध प्रयोगशालाएं और ई-लर्निंग सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

इससे छात्रों और शोधकर्ताओं को वैश्विक स्तर की सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

विभिन्न थीम आधारित केंद्र होंगे स्थापित

प्रस्तावित योजना के अनुसार संस्थान में कई विशेष केंद्र बनाए जाएंगे:

  • श्रुति केंद्र (वेद एवं उपनिषद)
  • दर्शन केंद्र (भारतीय दर्शन)
  • आयु केंद्र (आयुर्वेद और स्वास्थ्य)
  • विज्ञान केंद्र (भारतीय ज्ञान प्रणाली)
  • कला केंद्र (संस्कृति और सौंदर्य परंपरा)

बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

इस बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे, जिन्होंने संस्थान के विकास पर अपने सुझाव दिए।

प्रशासन का लक्ष्य इसे एक विश्वस्तरीय शोध और ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित करना है।

उत्तराखंड को मिलेगा वैश्विक पहचान का अवसर

कुल मिलाकर, यह पहल उत्तराखंड को धार्मिक ही नहीं, बल्कि ज्ञान और शोध के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

आने वाले समय में यह संस्थान भारतीय ज्ञान परंपरा को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

Share This Article
bpcnews.in is one of the fastest-growing Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India-based news and stories
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *