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न्यू नोएडा बसाने की तैयारी तेज, 37 गांवों की जमीन अधिग्रहण के लिए सूची फाइनल

BPC News National Desk
5 Min Read

उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और औद्योगिक विकास के बीच अब न्यू नोएडा को बसाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। लंबे समय से प्रस्तावित इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर अब जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है। पहले चरण में कुल 37 गांवों को चिन्हित किया गया है, जिनकी सूची फाइनल कर दी गई है। इनमें 24 गांव बुलंदशहर जिले के और 13 गांव गौतमबुद्ध नगर जिले के शामिल हैं। प्रशासन का दावा है कि किसानों से संवाद स्थापित कर सहमति के आधार पर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

किसानों से बातचीत के लिए प्रशासनिक तैयारी शुरू

न्यू नोएडा परियोजना को लेकर अधिकारियों ने प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। किसानों से बातचीत, दस्तावेजी कार्यवाही और फाइलिंग प्रक्रिया को सुचारु रूप से पूरा करने के लिए तीन तहसीलदारों की नियुक्ति की जाएगी। इसके अलावा ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के पास प्राधिकरण का अस्थायी कार्यालय भी खोले जाने की योजना बनाई गई है, ताकि स्थानीय स्तर पर किसानों और अधिकारियों के बीच समन्वय आसान हो सके।

किसानों को मिलेगा 4300 रुपये प्रति वर्गमीटर मुआवजा

परियोजना से जुड़े ओएसडी क्रांति शेखर ने जानकारी देते हुए बताया कि किसानों को मुआवजा यमुना प्राधिकरण के बराबर दिया जाएगा। जमीन अधिग्रहण के लिए मुआवजा दर 4300 रुपये प्रति वर्गमीटर तय की गई है, जिसे पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है। किसानों को बेहतर मुआवजा देने के उद्देश्य से दो अलग-अलग कैटेगरी बनाई गई हैं, ताकि भूमि की स्थिति और उपयोग के आधार पर भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।

इसी महीने शुरू हो सकती है किसानों से बातचीत

उन्होंने बताया कि किसानों के साथ बातचीत का सिलसिला इसी महीने से शुरू किया जा सकता है। प्रशासन का प्रयास है कि अधिक से अधिक किसानों की सहमति से प्रक्रिया पूरी हो, जिससे भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो। अधिकारियों के मुताबिक, न्यू नोएडा को आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक योजनाबद्ध शहर के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे रोजगार, उद्योग और आवास के नए अवसर पैदा होंगे।

18 अक्टूबर 2024 के बाद हुए निर्माण माने जाएंगे अवैध

हालांकि, जमीन अधिग्रहण को लेकर प्रशासन ने सख्त नियम भी लागू किए हैं। ओएसडी क्रांति शेखर ने स्पष्ट किया कि 18 अक्टूबर 2024 के बाद किए गए किसी भी निर्माण को पूरी तरह अवैध माना जाएगा। ऐसे निर्माणों की पहचान के लिए सैटेलाइट इमेज का सहारा लिया जाएगा। यदि किसी क्षेत्र में निर्धारित तिथि के बाद निर्माण पाया गया, तो उसे आबादी की श्रेणी में नहीं माना जाएगा और उस पर किसी प्रकार का मुआवजा भी नहीं दिया जाएगा।

अवैध निर्माण और फर्जी कब्जों पर रहेगी सख्त नजर

प्रशासन का मानना है कि इस कदम से फर्जी निर्माण और अवैध कब्जों पर रोक लगाई जा सकेगी। पिछले कुछ वर्षों में कई विकास परियोजनाओं में देखा गया है कि अधिग्रहण की सूचना के बाद तेजी से अवैध निर्माण शुरू हो जाते हैं, जिससे सरकारी योजनाओं में बाधा आती है और मुआवजे को लेकर विवाद पैदा होते हैं। इस बार प्रशासन पहले से सतर्क नजर आ रहा है।

चरणबद्ध तरीके से विकसित होगा न्यू नोएडा

सूत्रों के अनुसार, न्यू नोएडा परियोजना को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा। एक-एक गांव की जमीन अधिग्रहित करने के बाद वहां सड़क, औद्योगिक क्षेत्र, आवासीय सेक्टर और अन्य आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जाएगा। पेरिफेरल क्षेत्र को विकसित करने का भी प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिससे यातायात और कनेक्टिविटी बेहतर हो सके।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदल सकती है परियोजना

विशेषज्ञों का मानना है कि न्यू नोएडा परियोजना आने वाले वर्षों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदल सकती है। इससे न केवल औद्योगिक निवेश बढ़ेगा, बल्कि लाखों लोगों को रोजगार और बेहतर जीवन सुविधाएं भी मिलेंगी। हालांकि किसानों की सहमति और पारदर्शी मुआवजा प्रक्रिया इस परियोजना की सफलता के लिए सबसे अहम मानी जा रही है।

प्रशासन और किसानों की बातचीत पर टिकी निगाहें

अब सबकी नजर प्रशासन और किसानों के बीच होने वाली बातचीत पर टिकी है। यदि सहमति बनती है तो न्यू नोएडा जल्द ही उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े आधुनिक शहरों में शामिल हो सकता है।

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