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ऋषिकेश से नीलकंठ तक बनेगा रोपवे, 15 मिनट में पूरी होगी कठिन यात्रा

BPC News National Desk
4 Min Read

ऋषिकेश से नीलकंठ तक रोपवे परियोजना को मिली रफ्तार में धार्मिक पर्यटन और यात्रा सुविधाओं को आधुनिक बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया जा रहा है। अब तक श्रद्धालुओं की यात्रा आसान बनाने के लिए से रोपवे परियोजना शुरू होने जा रही है।

करीब 6.5 किलोमीटर लंबे इस रोपवे के निर्माण से हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। पहाड़ों और घने जंगलों से होकर गुजरने वाला यह रोपवे यात्रा को तेज और सुविधाजनक बनाएगा।

3 घंटे की यात्रा अब 15 मिनट में होगी पूरी

वर्तमान में पहुंचना श्रद्धालुओं के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता है।

मंदिर तक पहुंचने के लिए:

  • करीब 30 किलोमीटर लंबा सड़क मार्ग तय करना पड़ता है
  • कई श्रद्धालु 9 किलोमीटर की पैदल यात्रा भी करते हैं

गर्मी, बारिश और यात्रा सीजन में यह सफर काफी थकाऊ और समय लेने वाला साबित होता है। लेकिन रोपवे बनने के बाद यही यात्रा महज 15 मिनट में पूरी हो सकेगी, जबकि अभी इसमें लगभग तीन घंटे तक लग जाते हैं।

450 करोड़ रुपये की लागत से बनेगी परियोजना

यह महत्वाकांक्षी रोपवे परियोजना लगभग 450 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की जाएगी।

सरकार का मानना है कि यह परियोजना उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देगी और यात्रा सुविधाओं को आधुनिक बनाएगी।

राजाजी टाइगर रिजर्व से होकर गुजरेगा रोपवे

रोपवे का मार्ग और गंगा किनारे के वन क्षेत्रों से होकर गुजरेगा।

इसी वजह से परियोजना को पर्यावरणीय दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि परियोजना को इस तरह डिजाइन किया जाएगा जिससे जंगल और वन्यजीवों को न्यूनतम नुकसान पहुंचे।

श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की उम्मीद

हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।

विशेष रूप से:

  • सावन
  • शिवरात्रि
  • वीकेंड
  • छुट्टियों के मौसम

में यहां भारी भीड़ देखने को मिलती है। ऐसे समय सड़क मार्ग पर लंबा जाम लगना आम बात है।

रोपवे बनने के बाद:

  • ट्रैफिक दबाव कम होगा
  • यात्रा अधिक सुरक्षित होगी
  • श्रद्धालुओं को तेज सफर मिलेगा

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा

पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से और आसपास के क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

इन क्षेत्रों को होगा लाभ

  • होटल व्यवसाय
  • रेस्टोरेंट
  • टैक्सी सेवाएं
  • स्थानीय बाजार
  • छोटे व्यापारी
  • पर्यटन उद्योग

इसके साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

पर्यावरण को लेकर उठीं चिंताएं

हालांकि परियोजना को लेकर पर्यावरण प्रेमियों की चिंताएं भी सामने आ रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि:

  • निर्माण कार्य के दौरान पर्यावरणीय मानकों का पालन जरूरी होगा
  • जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी
  • गंगा क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को सुरक्षित रखना बड़ी जिम्मेदारी होगी

नीलकंठ महादेव मंदिर का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में भगवान शिव के प्रमुख तीर्थ स्थलों में गिना जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान भगवान शिव ने इसी स्थान पर विषपान किया था, जिसके कारण उनका कंठ नीला पड़ गया और उन्हें “नीलकंठ” कहा गया।

इसी वजह से यह मंदिर करोड़ों शिव भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

पर्यटन और आधुनिक तकनीक का अनोखा संगम

ऋषिकेश से नीलकंठ तक बनने वाला यह रोपवे उत्तराखंड के धार्मिक और पर्यटन मानचित्र को नई पहचान दे सकता है।

आधुनिक तकनीक, प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक आस्था का यह संगम श्रद्धालुओं के सफर को आसान बनाने के साथ-साथ राज्य में पर्यटन विकास की नई संभावनाएं भी खोलेगा।

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