पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 ने देश की राजनीति में जबरदस्त हलचल पैदा कर दी है। लंबे समय तक ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाले इस राज्य में इस बार चुनावी तस्वीर बदली हुई नजर आ रही है।
कई एग्जिट पोल में भारतीय जनता पार्टी को स्पष्ट बढ़त मिलती दिखाई गई है, जबकि कुछ सर्वे अब भी टीएमसी को मजबूत स्थिति में बता रहे हैं। हालांकि अंतिम नतीजों से पहले सबसे ज्यादा चर्चा रिकॉर्ड मतदान, चुनावी हिंसा और बदलते राजनीतिक समीकरणों की हो रही है।
रिकॉर्ड मतदान ने बढ़ाया सस्पेंस
इस चुनाव में सबसे बड़ी खासियत रहा अभूतपूर्व मतदान प्रतिशत। कई चरणों में 90% से अधिक मतदान दर्ज किया गया। दूसरे चरण में करीब 92% मतदान ने पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बढ़ा हुआ मतदान सत्ता परिवर्तन की संभावना और जनता की बढ़ी राजनीतिक जागरूकता का संकेत हो सकता है।
चुनावी हिंसा बनी बड़ी चिंता
चुनाव के दौरान कई जिलों में हिंसा की घटनाएं सामने आईं।
नॉर्थ 24 परगना, हावड़ा और पूर्व मेदिनीपुर जैसे इलाकों में टीएमसी और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें हुईं। भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी पर हमले की खबर भी सुर्खियों में रही।
हावड़ा में सुरक्षा बलों की कार्रवाई के दौरान एक बुजुर्ग की मौत का मामला भी विवाद का कारण बना।
स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने CAPF की लगभग 700 कंपनियों की तैनाती जारी रखने का निर्णय लिया है।
भाजपा की आक्रामक रणनीति
इस बार भाजपा ने बंगाल में बेहद संगठित और आक्रामक चुनाव अभियान चलाया। अमित शाह के नेतृत्व में पार्टी ने:
- बूथ स्तर तक संगठन मजबूत किया
- हिंदुत्व और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दे उठाए
- घुसपैठ और भ्रष्टाचार पर फोकस किया
- स्थानीय संस्कृति से जुड़ने की रणनीति अपनाई
“मछली भोज” जैसे प्रतीकों के जरिए पार्टी ने बंगाली पहचान से जुड़ने का प्रयास किया।
टीएमसी की रणनीति और चुनौतियां
दूसरी ओर, ममता बनर्जी अब भी अपने महिला, ग्रामीण और अल्पसंख्यक वोट बैंक पर भरोसा बनाए हुए हैं।
लेकिन राजनीतिक जानकारों के अनुसार:
- सत्ता विरोधी लहर
- भ्रष्टाचार के आरोप
- स्थानीय स्तर पर नाराजगी
ये सभी कारक टीएमसी के लिए चुनौती बन सकते हैं।
एग्जिट पोल vs असली नतीजे
एग्जिट पोल भले अंतिम परिणाम न हों, लेकिन उन्होंने बंगाल की राजनीति को गरमा दिया है।
2021 में भाजपा मजबूत विपक्ष बनकर उभरी थी, और अब 2026 में पार्टी सरकार बनाने का दावा कर रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है:
क्या ममता बनर्जी अपना किला बचा पाएंगी?
या 15 साल बाद बंगाल में सत्ता परिवर्तन होगा?
देशभर की नजर अब मतगणना के दिन पर टिकी है, जहां “खेला होबे” का असली परिणाम सामने आएगा।







