हिमालय की ऊंचाइयों में दौड़ेगा रोमांच की बर्फीली वादियों और हिमालय की ऊंची चोटियों के बीच बसी अब अंतरराष्ट्रीय एडवेंचर टूरिज्म के नक्शे पर अपनी नई पहचान बनाने जा रही है।
31 मई से शुरू होने वाली “नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन” को लेकर देशभर में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। इस हाई-एल्टीट्यूड अल्ट्रा मैराथन में अब तक लगभग 1000 प्रतिभागी पंजीकरण करा चुके हैं, जिनमें देश के 27 राज्यों के धावकों के साथ दो विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
तीन दिनों तक चलने वाला यह आयोजन 2 जून तक जारी रहेगा और प्रतिभागियों को रोमांच, साहस और कठिन चुनौतियों का अनोखा अनुभव देगा।
चमोली की दुर्गम घाटी में होगा आयोजन
द्वारा आयोजित यह अल्ट्रा मैराथन की दुर्गम नीती घाटी में कराई जा रही है।
बीते वर्ष आदि कैलास क्षेत्र में हुए सफल आयोजन के बाद इस बार सरकार ने सीमांत क्षेत्रों को पर्यटन से जोड़ने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है।
आयोजन में:
- भारतीय सेना
- (ITBP)
की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। दोनों एजेंसियां सुरक्षा, मेडिकल सहायता और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट उपलब्ध कराएंगी।
ऊंचाई और कठिन रास्तों की बड़ी चुनौती
इस अल्ट्रा रन की सबसे बड़ी खासियत इसकी अत्यधिक ऊंचाई और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियां हैं।
धावकों को:
- ठंडी हवाओं
- ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों
- कम ऑक्सीजन वाले क्षेत्रों
में दौड़ना होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लंबी दूरी की दौड़ शरीर पर सामान्य मैराथन की तुलना में कई गुना अधिक दबाव डालती है। ऐसे में यह प्रतियोगिता केवल शारीरिक क्षमता ही नहीं बल्कि मानसिक मजबूती की भी बड़ी परीक्षा होगी।
विश्व की छठवीं सबसे ऊंचाई वाली अल्ट्रा मैराथन
“नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन” विश्व की छठवीं और भारत की चौथी सबसे ऊंचाई पर आयोजित होने वाली अल्ट्रा मैराथन का रिकॉर्ड बनाएगी।
75 किलोमीटर अल्ट्रा रन रूट
दौड़ का मुख्य रूट:
- रिमखिम
- सुमना
- ग्रैंड कैन्यन स्ट्रेच
- मलारी
- नीती गांव
तक जाएगा।
इसके अलावा 42 किलोमीटर की मैराथन भी आयोजित की जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में प्रतिभागी हिस्सा लेंगे।
सीमांत क्षेत्रों के विकास को मिलेगा बढ़ावा
पर्यटन सचिव ने कहा कि यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सीमांत क्षेत्रों के विकास विजन और मुख्यमंत्री के ग्रामीण स्वरोजगार एवं आजीविका मिशन को मजबूती देगा।
उनके अनुसार:
- सीमांत गांवों को नई पहचान मिलेगी
- स्थानीय रोजगार बढ़ेगा
- पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी
सुरक्षा और मेडिकल सुविधाओं पर विशेष फोकस
अल्ट्रा मैराथन के दौरान प्रतिभागियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
विशेष व्यवस्थाएं
- सभी धावकों की स्वास्थ्य जांच अनिवार्य
- मेडिकल टीम तैनात
- सपोर्ट स्टेशन उपलब्ध
- आपातकालीन हेलिकॉप्टर सुविधा
- मौसम निगरानी व्यवस्था
ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अचानक मौसम बदलने और ऑक्सीजन स्तर कम होने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ
इस आयोजन से और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
इन क्षेत्रों को होगा सीधा फायदा
- होमस्टे व्यवसाय
- होटल उद्योग
- टैक्सी सेवाएं
- स्थानीय गाइड
- हस्तशिल्प कारोबार
- छोटे व्यापारी
दूर-दराज के गांवों में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
एडवेंचर टूरिज्म का नया केंद्र बन रहा उत्तराखंड
सरकार लंबे समय से राज्य को एडवेंचर टूरिज्म का बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में काम कर रही है।
पहले से ही:
- ट्रैकिंग
- पर्वतारोहण
- स्कीइंग
- रिवर राफ्टिंग
जैसी गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध उत्तराखंड अब हाई-एल्टीट्यूड अल्ट्रा मैराथन के जरिए भी वैश्विक पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है।
हिमालय की गोद में होने वाला यह आयोजन न केवल खिलाड़ियों के लिए रोमांचक अनुभव बनेगा, बल्कि उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता और सीमांत संस्कृति को दुनिया के सामने नई पहचान भी दिलाएगा।







