पुलिस महकमे में लंबे समय से चल रही कार्यवाहक व्यवस्था अब खत्म हो सकती है। 1991 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को उत्तर प्रदेश का नया पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (DGP) बनाए जाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
फिलहाल राजीव कृष्णा कार्यवाहक डीजीपी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही उनके नाम पर औपचारिक आदेश जारी किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो लंबे समय बाद यूपी पुलिस को स्थायी नेतृत्व मिलेगा।
मुकुल गोयल के हटने के बाद बनी थी अस्थायी व्यवस्था
पूर्व डीजीपी को हटाए जाने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस लंबे समय तक कार्यवाहक व्यवस्था के तहत संचालित होती रही।
स्थायी डीजीपी की नियुक्ति लगातार टलने से पुलिस प्रशासन और बेसिक पुलिसिंग को लेकर कई सवाल उठने लगे थे। पुलिस विभाग में स्थायी नेतृत्व की कमी का असर प्रशासनिक फैसलों और जवाबदेही पर भी दिखाई दे रहा था।
यूपीएससी प्रक्रिया बनी थी बड़ी बाधा
सूत्रों के अनुसार स्थायी डीजीपी की नियुक्ति में सबसे बड़ी बाधा संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC की प्रक्रिया थी।
बताया जा रहा है कि यूपीएससी बार-बार राज्य सरकार से यह पूछ रहा था कि आखिर पूर्व डीजीपी मुकुल गोयल को हटाने की वैध वजह क्या थी। इस संबंध में विस्तृत जवाब और दस्तावेजी प्रक्रियाएं पूरी होने में समय लगा।
अब माना जा रहा है कि सरकार की ओर से सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर दी गई हैं, जिसके बाद स्थायी डीजीपी नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।
अनुभवी अधिकारी माने जाते हैं राजीव कृष्णा
को एक अनुभवी और प्रशासनिक रूप से मजबूत अधिकारी माना जाता है। उन्होंने अपने लंबे सेवा काल में कई अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं।
पुलिस विभाग में उनकी छवि एक शांत लेकिन सख्त अधिकारी की रही है। ऐसे समय में जब यूपी पुलिस कानून-व्यवस्था और न्यायिक निगरानी जैसे कई मोर्चों पर दबाव का सामना कर रही है, तब स्थायी डीजीपी की नियुक्ति को बेहद अहम माना जा रहा है।
पुलिस कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
हालांकि केवल स्थायी डीजीपी की नियुक्ति से सभी चुनौतियां खत्म नहीं होंगी।
पिछले कुछ समय में सहित कई अदालतों ने विभिन्न मामलों में डीजीपी से सीधे एफिडेविट मांगे हैं। अदालतों ने जांच प्रक्रिया, गिरफ्तारी के नियमों और मानवाधिकार संबंधी प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
विशेष रूप से “अरेस्ट मेमो” जैसी बुनियादी कानूनी प्रक्रिया को लेकर पुलिस विभाग की कार्यशैली चर्चा में रही है।
पुलिस सुधारों की भी होगी बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में पुलिसिंग अब केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं रह गई है।
साइबर अपराध, महिला सुरक्षा, डिजिटल जांच, संगठित अपराध और कानून व्यवस्था जैसी नई चुनौतियों के बीच पुलिस नेतृत्व को तकनीकी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर मजबूत होना होगा।
ऐसे में नए स्थायी डीजीपी के सामने पुलिस बल की कार्यप्रणाली में सुधार और जनता का भरोसा मजबूत करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में बढ़ी चर्चा
राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में भी इस संभावित नियुक्ति को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
माना जा रहा है कि स्थायी डीजीपी की नियुक्ति से पुलिस विभाग में निर्णय प्रक्रिया तेज होगी और जवाबदेही स्पष्ट होगी। इसके साथ ही विभाग के भीतर लंबित सुधारों को लागू करने में भी तेजी आ सकती है।
सरकार के फैसले पर टिकी निगाहें
फिलहाल पूरे प्रदेश की निगाहें सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं।
यदि को स्थायी डीजीपी नियुक्त किया जाता है, तो उनके सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ पुलिस सुधारों को जमीन पर लागू करने की बड़ी चुनौती होगी।








