गाजियाबाद में कथित जबरन धर्मांतरण के एक मामले को लेकर सोमवार को विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। शहर में निकाले गए इस बड़े मार्च में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया और धर्मांतरण के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।
क्या है पूरा मामला?
यह विरोध प्रदर्शन महाराष्ट्र के नासिक स्थित एक मल्टीनेशनल कंपनी से जुड़े एक गंभीर मामले के खिलाफ किया गया। जानकारी के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में सातवें आरोपी के रूप में कंपनी की एचआर निदा खान को गिरफ्तार किया है।
आरोपों के मुताबिक, कंपनी में कार्यरत कुछ मुस्लिम टीम लीडर्स द्वारा हिंदू महिला कर्मचारियों के साथ कथित रूप से:
- शारीरिक शोषण
- जबरन नमाज पढ़ने का दबाव
- धार्मिक प्रतीकों का अपमान
- धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करना
जैसी गतिविधियां की गईं।
इस घटना के सामने आने के बाद विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों में भारी रोष देखने को मिल रहा है।
विहिप और बजरंग दल का विरोध प्रदर्शन
प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर और झंडे लेकर शहर में मार्च निकाला। इस दौरान:
- जोरदार नारेबाजी की गई
- प्रतीकात्मक रूप से पुतला दहन किया गया
- धर्मांतरण के खिलाफ कड़े कानून की मांग उठाई गई
विहिप और बजरंग दल के नेताओं ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन हैं और समाज के साम्प्रदायिक सौहार्द के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं।

सरकार से क्या मांग की गई?
प्रदर्शन के दौरान संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की:
- जबरन धर्मांतरण पर सख्त कानून बनाया जाए
- “लव जिहाद” जैसे मामलों पर राष्ट्रीय स्तर पर एक समान कानून लागू किया जाए
- दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए
पुलिस का क्या कहना है?
प्रदर्शन के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए गाजियाबाद में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार:
- स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही
- मार्च शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ
- नासिक से जुड़े मामले की जांच संबंधित राज्य पुलिस द्वारा की जा रही है
- तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी
देशभर में फिर चर्चा में धर्मांतरण का मुद्दा
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर देश में धर्मांतरण से जुड़े मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
जहां एक ओर कुछ लोग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मामला मानते हैं, वहीं दूसरी ओर कई सामाजिक और धार्मिक संगठन इसे एक सुनियोजित साजिश बताते हुए कड़े कानून की मांग कर रहे हैं।
गाजियाबाद में हुआ यह विरोध प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि धर्मांतरण जैसे संवेदनशील मुद्दों को लेकर लोगों में भावनाएं काफी प्रबल हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस दिशा में क्या कदम उठाती है और जांच एजेंसियां इस मामले में क्या निष्कर्ष निकालती हैं।









