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नेपाल में राजशाही की बहाली की मांग फिर तेज, काठमांडू में हजारों समर्थक सड़कों पर उतरे

BPC News National Desk
4 Min Read

नेपाल में एक बार फिर राजशाही की बहाली की मांग जोर पकड़ती नजर आ रही है। राजधानी काठमांडू में रविवार को हजारों राजशाही समर्थकों ने सड़कों पर उतरकर पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह की वापसी की जोरदार मांग की। यह प्रदर्शन मार्च 2026 में होने वाले संसदीय चुनावों से ठीक पहले हुआ है और इसे पिछले साल सितंबर में हुए जेन-जेड युवाओं के आंदोलन के बाद राजशाही समर्थकों की पहली बड़ी रैली माना जा रहा है।

पृथ्वी नारायण शाह की प्रतिमा के पास जुटी भीड़

प्रदर्शनकारी पृथ्वी नारायण शाह की प्रतिमा के आसपास एकत्र हुए, जहां उन्होंने नारे लगाए—

“हम अपने राजा से प्यार करते हैं, राजा को वापस लाओ”
“राजा लाओ, देश बचाओ”

समर्थकों ने नेपाल के झंडे लहराए, पूर्व राजा ज्ञानेंद्र के फोटो लिए और लाल बैनर दिखाए। पूरे इलाके में राजशाही समर्थक नारों की गूंज सुनाई दी।

पृथ्वी जयंती और राष्ट्रीय एकता दिवस पर रैली

यह रैली पृथ्वी जयंती और राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर आयोजित की गई। पृथ्वी नारायण शाह को नेपाल के एकीकरण का संस्थापक माना जाता है और उनकी जन्मजयंती पर हर साल यह दिन मनाया जाता है। समर्थकों ने इस मौके को राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हुए राजशाही की बहाली की मांग को और तेज किया।

2008 में खत्म हुई थी राजशाही, बना था गणतंत्र

नेपाल में 2008 में राजशाही को समाप्त कर गणतंत्र घोषित किया गया था। उस समय अंतिम शाह वंश के राजा ज्ञानेंद्र शाह को पद छोड़ना पड़ा था। तब से देश में:

  • राजनीतिक अस्थिरता,

  • बार-बार सरकारों का गिरना,

  • भ्रष्टाचार के आरोप,

  • और आर्थिक चुनौतियां
    लगातार बनी हुई हैं।

“अस्थिर गणतंत्र” के विकल्प के रूप में देखी जा रही राजशाही

राजशाही समर्थकों का दावा है कि वर्तमान व्यवस्था देश को स्थिरता नहीं दे पा रही है। उनका कहना है कि:

“राजतंत्र ही राष्ट्रीय एकता, स्थिरता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत कर सकता है।”

विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रदर्शन वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था से जनता की बढ़ती निराशा का संकेत है।

जेन-जेड आंदोलन के बाद बदला माहौल

पिछले साल सितंबर 2025 में जेन-जेड युवाओं के हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिनके बाद देश में अंतरिम सरकार बनी और मार्च 2026 में नए चुनावों की घोषणा की गई। उसी के बाद से राजनीतिक माहौल में अस्थिरता और गहराई है, जिसका फायदा अब राजशाही समर्थक उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

पूर्व राजा ज्ञानेंद्र का संदेश, शांति की अपील

पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह ने हाल ही में एक संदेश जारी कर:

  • देश की स्थिति पर चिंता जताई,

  • और शांति बनाए रखने की अपील की।

हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर राजशाही की बहाली की मांग नहीं की, लेकिन समर्थक उनके बयान को राजतंत्र की वापसी का संकेत मान रहे हैं।

भारी पुलिस बल, रैली रही शांतिपूर्ण

रैली के दौरान भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। इसके बावजूद प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और किसी भी तरह की हिंसा या झड़प की सूचना नहीं मिली।

चुनाव से पहले बड़ा संकेत

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रदर्शन मार्च 2026 के चुनावों से पहले बड़ा संकेत है।
कई लोग यह मानने लगे हैं कि:

राजनीतिक अस्थिरता और भ्रष्टाचार से तंग आ चुकी जनता अब पुरानी व्यवस्था की ओर लौटने की बात सोच रही है।

क्या नेपाल फिर राजतंत्र की ओर बढ़ेगा?

यह सवाल अब नेपाल की राजनीति में तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।
क्या नेपाल फिर से राजशाही की ओर लौटेगा या गणतंत्र व्यवस्था को ही मजबूत किया जाएगा—इसका जवाब आने वाले चुनाव और जनता का मूड तय करेगा।

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