29 अप्रैल 1999 की वह रात आज भी भारतीय समाज और न्याय व्यवस्था के इतिहास में एक गहरे घाव की तरह दर्ज है। दिल्ली के एक पॉश पब में शराब न मिलने पर गुस्से में आकर राजनीतिक परिवार के बेटे मनु शर्मा (सिद्धार्थ वशिष्ठ) ने मॉडल और बारटेंडर जेसिका लाल को गोली मार दी थी। सैकड़ों गवाहों की मौजूदगी के बावजूद शुरुआती ट्रायल में गवाह पलट गए और आरोपी बरी हो गया। बाद में मीडिया और जनता के दबाव के चलते 2006 में दिल्ली हाई कोर्ट ने मनु शर्मा को उम्रकैद की सजा सुनाई। अच्छे व्यवहार के आधार पर 2020 में वह रिहा हुआ।
रिहाई के बाद मनु शर्मा ने अपना नाम बदलकर सिद्धार्थ शर्मा रखा और ‘इंद्री’ नाम से एक प्रीमियम सिंगल मॉल्ट व्हिस्की ब्रांड लॉन्च किया। यह ब्रांड बेहद कम समय में सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंच गया। आज यह भारतीय सिंगल मॉल्ट कैटेगरी में नंबर वन बताया जाता है और 800 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर चुका है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इसे कई पुरस्कार मिल चुके हैं।
लेकिन अब इंद्री व्हिस्की का लाल बिंदी जैसा लोगो एक नए विवाद का कारण बन गया है।
लोगो और जेसिका की तस्वीर: सवाल क्यों उठ रहे हैं?
सोशल मीडिया, रेडिट, इंस्टाग्राम और मीडियम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स ने गौर किया कि इंद्री के लोगो में मौजूद लाल डॉट, जेसिका लाल की उस मशहूर तस्वीर से मिलता-जुलता है जिसमें वह लाल बिंदी लगाए हुए थीं। यही तस्वीर 1999–2000 के दौरान हर न्यूज चैनल, अखबार और बाद में बनी फिल्म ‘No One Killed Jessica’ में बार-बार दिखाई गई थी।
कुछ यूजर्स का कहना है कि यह लाल डॉट उन्हें जेसिका की बिंदी और गोली के घाव दोनों की याद दिलाता है। कई लोगों ने इसे “एक पीड़िता की स्मृति के साथ क्रूर प्रयोग” तक कह दिया है।
संयोग या ब्रांडिंग रणनीति?
फिलहाल ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है कि इंद्री का लोगो जानबूझकर जेसिका लाल की तस्वीर से प्रेरित है। न ही कंपनी की वेबसाइट पर और न ही आधिकारिक तौर पर इस पर कोई बयान दिया गया है।
ब्रांडिंग एक्सपर्ट्स का मानना है कि लाल डॉट भारतीय संस्कृति में बिंदी, शक्ति और पहचान का प्रतीक भी हो सकता है। लेकिन जिस व्यक्ति का नाम जेसिका लाल केस से जुड़ा हो, उसके ब्रांड में इस तरह का प्रतीक आना लोगों के मन में सवाल खड़े कर रहा है।
सोशल मीडिया पर बॉयकॉट की मांग
इंद्री की बढ़ती लोकप्रियता और उसके पीछे मनु शर्मा का नाम सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बॉयकॉट इंद्री ट्रेंड करने लगा है। कई लोग सवाल पूछ रहे हैं—
“क्या हम एक ऐसे व्यक्ति के बनाए प्रोडक्ट को खरीदकर उसके अतीत को भूल सकते हैं?”
“क्या अपराध की सजा पूरी हो जाने के बाद समाज को सब माफ कर देना चाहिए?”
न्याय, सुधार और समाज की दुविधा
यह विवाद सिर्फ एक लोगो तक सीमित नहीं है। यह न्याय व्यवस्था, अपराधी के सुधार और पीड़िता की स्मृति के सम्मान से जुड़ा गहरा सवाल है।
एक तरफ कानून कहता है कि सजा पूरी होने के बाद व्यक्ति को नया जीवन शुरू करने का अधिकार है, वहीं दूसरी ओर समाज भावनात्मक रूप से जेसिका लाल जैसी पीड़िताओं को नहीं भूल पाता।
जेसिका लाल केस: आज भी जिंदा सवाल
जेसिका लाल का मामला आज भी भारतीय न्याय व्यवस्था की कमजोरियों और मीडिया की ताकत का प्रतीक माना जाता है। इंद्री का लाल डॉट लोगो अब उसी मामले को फिर से चर्चा में ले आया है।
संयोग हो या रणनीति, लेकिन यह लाल बिंदी अब सिर्फ एक डिजाइन नहीं रही—यह एक सवाल का प्रतीक बन चुकी है:
न्याय हुआ या सिर्फ समय बीत गया?








