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अमेरिका-बांग्लादेश ट्रेड डील पर हस्ताक्षर, कुछ टेक्सटाइल पर जीरो टैरिफ; भारत के टेक्सटाइल सेक्टर में बढ़ी चिंता

BPC News National Desk
5 Min Read

अमेरिका और बांग्लादेश ने सोमवार, 9 फरवरी 2026 को एक नई रेसिप्रोकल ट्रेड डील (Reciprocal Trade Agreement) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के साथ दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। व्हाइट हाउस और यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) द्वारा जारी संयुक्त बयान के अनुसार, यह डील अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रेसिप्रोकल टैरिफ पॉलिसी का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ट्रेड डेफिसिट को कम करना और अमेरिकी उत्पादों को वैश्विक बाजारों में बेहतर पहुंच देना है।

डील के प्रमुख प्रावधान

इस ट्रेड एग्रीमेंट के तहत अमेरिका ने बांग्लादेश से आने वाले मूल (originating) उत्पादों पर रेसिप्रोकल टैरिफ को 20 प्रतिशत से घटाकर 19 प्रतिशत करने का फैसला लिया है। यह दर अप्रैल 2025 में जारी एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 14257 के तहत निर्धारित मूल टैरिफ से कम मानी जा रही है।

इसके साथ ही, कुछ चुनिंदा टेक्सटाइल और अपैरल उत्पादों को जीरो रेसिप्रोकल टैरिफ के दायरे में लाया गया है। यह छूट केवल उन्हीं उत्पादों को मिलेगी, जो अमेरिकी उत्पादित कपास (US-produced cotton) और मैन-मेड फाइबर से तैयार किए गए होंगे। इन उत्पादों की मात्रा अमेरिका से बांग्लादेश को निर्यात होने वाले टेक्सटाइल इनपुट्स पर निर्भर करेगी।

बांग्लादेश को क्या मिलेगा, अमेरिका को क्या फायदा

समझौते के बदले में बांग्लादेश अमेरिका के कृषि और औद्योगिक उत्पादों को बड़ा प्रेफरेंशियल मार्केट एक्सेस देगा। इसमें डेयरी, बीफ, पोल्ट्री, सोयाबीन, ऊर्जा उत्पादों समेत कई वस्तुओं पर टैरिफ को या तो पूरी तरह समाप्त किया जाएगा या चरणबद्ध तरीके से कम किया जाएगा।

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के चीफ एडवाइजर मुहम्मद यूनुस ने इस डील को देश के गारमेंट और टेक्सटाइल सेक्टर के लिए राहत करार दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी बाजार में कुछ उत्पादों पर जीरो टैरिफ से बांग्लादेशी रेडीमेड गारमेंट्स को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी।

भारत के टेक्सटाइल सेक्टर में चिंता

यह डील ऐसे समय पर सामने आई है जब अमेरिका और भारत के बीच भी हाल ही में ट्रेड फ्रेमवर्क को अंतिम रूप दिया गया था। फरवरी 2026 की शुरुआत में अमेरिका-भारत समझौते के तहत भारत से आने वाले उत्पादों पर रेसिप्रोकल टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किया गया था।

हालांकि, अमेरिका-बांग्लादेश डील में शामिल जीरो टैरिफ क्लॉज ने भारतीय टेक्सटाइल और गारमेंट एक्सपोर्टर्स की चिंता बढ़ा दी है। भारतीय व्यापारियों का कहना है कि अमेरिकी कपास से बने बांग्लादेशी परिधान अमेरिकी बाजार में टैक्स-फ्री पहुंच पाएंगे, जबकि भारतीय उत्पादों पर 18 प्रतिशत टैरिफ लागू रहेगा। इससे रेडीमेड गारमेंट्स के क्षेत्र में बांग्लादेश को भारत पर बढ़त मिल सकती है।

ट्रंप का ‘स्मार्ट ट्रेड प्ले’?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील ट्रंप प्रशासन की एक सोची-समझी रणनीति है। एक तरफ अमेरिकी किसानों और कॉटन उत्पादकों को बांग्लादेश में बड़ा बाजार मिलेगा, वहीं दूसरी ओर बांग्लादेशी गारमेंट्स को सीमित राहत देकर अमेरिकी बाजार में सप्लाई चेन मजबूत की जाएगी। इससे अमेरिका का ट्रेड बैलेंस भी बेहतर होने की उम्मीद है।

डील से जुड़े अन्य अहम बिंदु

  • बांग्लादेश अमेरिका से लगभग 3.5 अरब डॉलर के कृषि उत्पाद और 15 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पाद खरीदने का कमिटमेंट देगा।

  • 25 बोइंग विमानों की संभावित खरीद पर भी सहमति बनी है।

  • डिजिटल ट्रेड, सप्लाई चेन रेजिलिएंस, श्रम और पर्यावरणीय मानकों पर सहयोग बढ़ाया जाएगा।

यह समझौता बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनावों से ठीक पहले हुआ है, जिससे राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। फिलहाल दोनों देश घरेलू कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर इस डील को लागू करने की तैयारी कर रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जीरो टैरिफ प्रावधान सीमित मात्रा में लागू होगा, इसलिए भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर पर इसका असर फिलहाल सीमित रह सकता है, लेकिन स्थिति पर करीबी नजर बनाए रखना जरूरी होगा।

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