इस्लामाबाद में पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के दौरान रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अमेरिका के खिलाफ बेहद कड़ा और विवादित बयान दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने अपने रणनीतिक हितों के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल किया और बाद में उसे “टॉयलेट पेपर से भी बदतर तरीके से फेंक दिया।”
यह बयान हाल ही में इस्लामाबाद में एक शिया मस्जिद पर हुए घातक आतंकी हमले के बाद आतंकवाद पर चल रही संसदीय बहस के दौरान सामने आया।
संसद में दिया विवादित बयान
ख्वाजा आसिफ ने अपने भाषण में कहा कि पाकिस्तान ने दशकों तक अमेरिका का साथ दिया, लेकिन बदले में उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा।
उन्होंने कहा:
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पाकिस्तान को “उपयोग करके छोड़ दिया गया”
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ये जंगें पाकिस्तान की नहीं, बल्कि महाशक्तियों की थीं
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अमेरिका के साथ गठजोड़ ऐतिहासिक गलती साबित हुआ
उन्होंने विशेष रूप से 9/11 के बाद अफगानिस्तान युद्ध में शामिल होने के फैसले को गंभीर रणनीतिक भूल बताया।
अमेरिका को दिया गया समर्थन और उसका परिणाम
रक्षा मंत्री ने स्वीकार किया कि पाकिस्तान ने अमेरिका को कई तरह से सहयोग दिया:
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हवाई क्षेत्र उपलब्ध कराया
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सैन्य सहयोग दिया
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अफगान युद्ध में भागीदारी की
लेकिन उनके अनुसार बदले में पाकिस्तान को मिला:
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आतंकवाद में वृद्धि
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आर्थिक संकट
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सामाजिक अस्थिरता
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कट्टरता का विस्तार
पाकिस्तान-अमेरिका संबंधों की जटिल पृष्ठभूमि
दशकों से पाकिस्तान और अमेरिका के संबंध उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं।
मुख्य चरण:
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सोवियत-अफगान युद्ध (1979–89) में सहयोग
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9/11 के बाद “वॉर ऑन टेरर” में साझेदारी
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2021 में अमेरिका के अफगानिस्तान से हटने के बाद तनाव
तालिबान की वापसी और बढ़ते आतंकी हमलों ने दोनों देशों के रिश्तों को और कमजोर किया है।
राजनीतिक और रणनीतिक संकेत
विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान कई संकेत देता है:
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पाकिस्तान में बढ़ती अमेरिका-विरोधी भावना
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घरेलू राजनीति में लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश
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स्वतंत्र विदेश नीति की मांग
कुछ विशेषज्ञ इसे “आधा सच” बताते हैं, क्योंकि पाकिस्तान ने भी अमेरिकी सहायता और रणनीतिक लाभ उठाए थे।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज
ख्वाजा आसिफ के बयान ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियां बटोरी हैं। इससे पाकिस्तान की विदेश नीति और अमेरिका के साथ भविष्य के रिश्तों पर नई बहस शुरू हो गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह बयान केवल राजनीतिक बयानबाजी है या वास्तव में विदेश नीति में बदलाव का संकेत।
निष्कर्ष
रक्षा मंत्री का यह बयान पाकिस्तान की बदलती रणनीतिक सोच और अमेरिका के साथ जटिल रिश्तों को उजागर करता है। यह स्पष्ट करता है कि आतंकवाद, सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियों के बीच पाकिस्तान अब अपने पुराने गठबंधनों पर पुनर्विचार कर रहा है।







