Operation Sindoor Anniversary Ceremony के अवसर पर जयपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने देश की नई सैन्य रणनीति और रक्षा नीति को लेकर बड़ा संदेश दिया।
कार्यक्रम में सेना के शीर्ष अधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत अब केवल जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में किसी भी चुनौती की स्थिति में युद्धक्षेत्र की दिशा और स्वरूप भी भारत ही तय करेगा।
इस बयान को भारत की बदलती रणनीतिक सोच और अधिक आक्रामक रक्षा नीति का संकेत माना जा रहा है।
“ऑपरेशन सिंदूर” को बताया “गोल्ड स्टैंडर्ड”
समारोह को संबोधित करते हुए Rajeev Ghai ने “ऑपरेशन सिंदूर” को भारतीय सैन्य इतिहास का “गोल्ड स्टैंडर्ड” बताया।
उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन ने साबित कर दिया कि भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना अब पूरी तरह एकीकृत युद्ध प्रणाली के तहत काम करने में सक्षम हैं।
अधिकारियों के अनुसार तीनों सेनाओं के समन्वय से आतंकवादी ठिकानों पर सटीक और प्रभावी कार्रवाई की गई, जिससे दुश्मन को बड़ा नुकसान पहुंचा।
भारत की रक्षा नीति में आया बड़ा बदलाव
लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने कहा कि भारत की रक्षा नीति में अब निर्णायक बदलाव आ चुका है।
उन्होंने कहा कि पहले भारत सीमित जवाबी रणनीति अपनाता था, लेकिन अब देश की सैन्य सोच अधिक:
- आक्रामक
- तकनीकी रूप से उन्नत
- रणनीतिक
- आधुनिक युद्ध प्रणाली आधारित
हो चुकी है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब हर चुनौती का जवाब अपने समय, अपने तरीके और अपनी शर्तों पर देने की क्षमता रखता है।
आधुनिक तकनीक का हुआ व्यापक इस्तेमाल
अधिकारियों ने बताया कि “ऑपरेशन सिंदूर” केवल सैन्य कार्रवाई नहीं था, बल्कि यह भारत की नई सुरक्षा नीति का प्रतीक भी था।
इस अभियान में आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग किया गया, जिनमें शामिल हैं:
- ड्रोन निगरानी
- सटीक मिसाइल प्रणाली
- रियल टाइम इंटेलिजेंस
- आधुनिक संचार नेटवर्क
- संयुक्त सैन्य समन्वय
अधिकारियों के अनुसार इस ऑपरेशन की सफलता ने दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता को लेकर किसी भी स्तर तक जाने के लिए तैयार है।
बदलते युद्ध का नया स्वरूप
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य और भविष्य के युद्धों पर भी चर्चा की।
उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह गए हैं। आने वाले समय में युद्ध के नए स्वरूप सामने आ रहे हैं, जैसे:
- साइबर हमले
- ड्रोन युद्ध
- अंतरिक्ष तकनीक
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित युद्ध प्रणाली
- इलेक्ट्रॉनिक युद्ध
अधिकारियों ने कहा कि भारत अपनी सेनाओं को तेजी से आधुनिक बना रहा है ताकि हर प्रकार की चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।
आतंकवाद के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति
सेना के अधिकारियों ने साफ किया कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति अब पूरी तरह “जीरो टॉलरेंस” पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि यदि देश की सुरक्षा को खतरा पहुंचाने की कोशिश की गई तो भारत केवल प्रतिक्रिया नहीं देगा, बल्कि दुश्मन की रणनीति और युद्धक्षेत्र दोनों को नियंत्रित करने की क्षमता रखेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान भारत के बढ़ते सैन्य आत्मविश्वास और रणनीतिक बदलाव को दर्शाता है।
संयुक्त सैन्य संचालन को मिली नई पहचान
समारोह में मौजूद सैन्य विशेषज्ञों ने कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर” ने भारतीय सेनाओं के बीच संयुक्त संचालन क्षमता को नई पहचान दी है।
पहले अलग-अलग स्तरों पर कार्य करने वाली सेनाएं अब:
- एकीकृत कमान
- साझा रणनीति
- रियल टाइम समन्वय
- तकनीकी सहयोग
के तहत काम कर रही हैं।
इससे किसी भी सैन्य अभियान की गति और प्रभावशीलता दोनों में बड़ा सुधार देखने को मिला है।
शहीद जवानों को दी गई श्रद्धांजलि
कार्यक्रम के दौरान शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि भी दी गई।
अधिकारियों ने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए बलिदान देने वाले जवानों की वीरता और समर्पण ही भारतीय सेना की सबसे बड़ी ताकत है।
सेना ने दोहराया कि देश की सीमाओं और नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए हर आवश्यक कदम उठाया जाएगा।
भारत की नई रणनीतिक सोच का संकेत
“ऑपरेशन सिंदूर” की पहली वर्षगांठ पर दिए गए इन बयानों को भारत की नई रणनीतिक सोच और मजबूत रक्षा नीति का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारत केवल रक्षात्मक नहीं बल्कि निर्णायक, सक्रिय और आधुनिक सैन्य शक्ति के रूप में वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका और मजबूत करेगा।







