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निगम बोध घाट की यमुना बाजार कॉलोनी पर संकट, 310 परिवारों को मिला घर खाली करने का नोटिस

BPC News National Desk
6 Min Read

राजधानी दिल्ली के Nigam Bodh Ghat स्थित Yamuna Bazaar Colony में रहने वाले सैकड़ों परिवारों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन द्वारा इलाके को खाली कराने के लिए जारी किए गए नोटिस के बाद करीब 310 परिवारों में दहशत और असमंजस का माहौल बना हुआ है।

प्रशासन ने इन परिवारों को 15 दिनों के भीतर अपने घर खाली करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों के अनुसार यह क्षेत्र “0 ज़ोन” यानी अत्यंत संवेदनशील बाढ़ क्षेत्र में आता है, जहां भविष्य में बड़ा खतरा हो सकता है।

प्रशासन ने सुरक्षा और बाढ़ का दिया हवाला

अधिकारियों का कहना है कि Yamuna River के किनारे स्थित यह इलाका हर वर्ष बाढ़ के दौरान सबसे पहले प्रभावित होता है। प्रशासन के मुताबिक लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है।

प्रशासन का दावा है कि यमुना के आसपास बने अवैध निर्माण नदी के प्राकृतिक प्रवाह को प्रभावित करते हैं, जिससे बाढ़ का खतरा और बढ़ जाता है। इसी कारण समय-समय पर ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों को खाली कराने की कार्रवाई की जाती रही है।

कानूनी विवाद में फंसा मामला

इस पूरे घटनाक्रम ने अब कानूनी और राजनीतिक रूप ले लिया है। स्थानीय निवासियों का दावा है कि जिस जमीन पर वे वर्षों से रह रहे हैं, वह Delhi Development Authority के अधिकार क्षेत्र में आती है।

लोगों का कहना है कि इस मामले की सुनवाई पहले से अदालत में चल रही है और उन्हें हाईकोर्ट से स्टे ऑर्डर भी मिला हुआ है। ऐसे में प्रशासन द्वारा अचानक नोटिस जारी करना कई सवाल खड़े कर रहा है।

स्थानीय निवासियों के अनुसार यदि मामला न्यायालय में लंबित है, तो प्रशासन को अदालत के अंतिम फैसले तक इंतजार करना चाहिए था।

कई दशकों से रह रहे हैं परिवार

कॉलोनी में रहने वाले लोगों का कहना है कि कई परिवार यहां पिछले कई दशकों से रह रहे हैं। उनके पास बिजली, पानी और अन्य सरकारी दस्तावेज भी मौजूद हैं।

निवासियों का आरोप है कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें हटाने की कोशिश की जा रही है, जिससे सैकड़ों परिवार बेघर हो सकते हैं।

लोगों का कहना है कि प्रशासन को पहले पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए और उसके बाद ही किसी प्रकार की कार्रवाई करनी चाहिए।

क्या कानूनी प्रक्रिया का पालन हुआ?

इस पूरे मामले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या प्रशासन ने कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया है।

कानून विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी मामले में हाईकोर्ट द्वारा स्टे आदेश जारी किया गया है, तो संबंधित विभागों को कार्रवाई से पहले अदालत की स्थिति स्पष्ट करनी होती है।

हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक इस विषय पर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

पर्यावरण विशेषज्ञों ने कार्रवाई को बताया जरूरी

दूसरी ओर पर्यावरण विशेषज्ञ इस कार्रवाई को सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से जरूरी बता रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यमुना किनारे लगातार बढ़ते अतिक्रमण के कारण नदी का प्राकृतिक क्षेत्र सिकुड़ता जा रहा है। इससे बाढ़ का खतरा और गंभीर हो सकता है।

उनके अनुसार यदि समय रहते संवेदनशील क्षेत्रों को खाली नहीं कराया गया, तो भविष्य में बड़ी जनहानि की आशंका बढ़ सकती है।

राजनीतिक गलियारों में भी बढ़ा विवाद

यह मुद्दा अब राजनीतिक रूप भी लेता नजर आ रहा है। कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय नेताओं ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

कुछ नेताओं ने इसे गरीब और निम्न आय वर्ग के लोगों के अधिकारों पर हमला बताया है, जबकि कुछ ने इसे अदालत की अवमानना तक करार दिया है।

आने वाले दिनों में यह मुद्दा दिल्ली की राजनीति में बड़ा विवाद बन सकता है।

पुनर्वास की मांग तेज

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन वास्तव में सुरक्षा को लेकर चिंतित है, तो पहले प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की ठोस व्यवस्था की जानी चाहिए।

निवासियों का तर्क है कि बिना वैकल्पिक आवास के अचानक बेदखली मानवीय दृष्टिकोण से उचित नहीं मानी जा सकती।

कई परिवारों का कहना है कि उनके सामने अब अपने घर और भविष्य दोनों को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।

अदालत और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी निगाहें

फिलहाल Yamuna Bazaar Colony के लोग डर और असमंजस के माहौल में जी रहे हैं। एक ओर प्रशासन सुरक्षा और बाढ़ के खतरे का हवाला दे रहा है, वहीं दूसरी ओर लोग अपने घर और अधिकार बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।

अब सबकी निगाहें अदालत और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। यह मामला केवल अतिक्रमण या सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें मानवाधिकार, पुनर्वास और कानूनी प्रक्रिया जैसे कई महत्वपूर्ण सवाल भी जुड़ गए हैं।

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