Donald Trump के दूसरे कार्यकाल में Pakistan को लेकर उनके बयानों और रुख ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। हाल के महीनों में ट्रंप कई बार पाकिस्तान और वहां की सेना की सार्वजनिक रूप से सराहना कर चुके हैं। खासतौर पर पाकिस्तानी सेना प्रमुख Asim Munir को लेकर दिए गए उनके बयानों ने भारत में राजनीतिक और रणनीतिक हलकों में चिंता बढ़ा दी है।
पाकिस्तान को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अहम बताया
ट्रंप ने कुछ सार्वजनिक मंचों पर पाकिस्तान को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण देश बताया है। उन्होंने असीम मुनीर की नेतृत्व क्षमता की भी तारीफ की, जिसके बाद भारत में इसे लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई राजनीतिक विश्लेषकों और रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह रुख भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से असहज स्थिति पैदा कर सकता है।
25 वर्षों में मजबूत हुए भारत-अमेरिका संबंध
पिछले लगभग 25 वर्षों में India और United States के संबंधों में लगातार मजबूती आई है। रक्षा, व्यापार, तकनीक, इंडो-पैसिफिक रणनीति और आतंकवाद विरोधी सहयोग जैसे कई क्षेत्रों में दोनों देशों की साझेदारी मजबूत हुई है। ऐसे में ट्रंप द्वारा पाकिस्तान को लेकर दिखाई जा रही नरमी और प्रशंसा को भारत में संदेह की नजर से देखा जा रहा है।
अमेरिकी विदेश नीति केवल राष्ट्रपति के बयानों से तय नहीं
हालांकि अमेरिकी विदेश नीति के जानकारों का कहना है कि ट्रंप के बयान और अमेरिका की संस्थागत विदेश नीति को अलग-अलग नजरिए से समझना जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिकी विदेश नीति केवल राष्ट्रपति के व्यक्तिगत बयानों से तय नहीं होती, बल्कि उसमें Pentagon, United States Department of State, कांग्रेस और रणनीतिक संस्थानों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
इंडो-पैसिफिक रणनीति में भारत की भूमिका अहम
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के लिए भारत आज भी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में से एक है। चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और रक्षा सहयोग बढ़ाने में भारत की भूमिका अमेरिका के लिए बेहद अहम बनी हुई है। इसलिए केवल राजनीतिक बयानबाजी के आधार पर भारत-अमेरिका संबंधों को कमजोर मानना जल्दबाजी होगी।
पाकिस्तान को लेकर बढ़ी भारत की सतर्कता
इसके बावजूद ट्रंप के बयानों ने भारत में राजनीतिक चर्चा जरूर तेज कर दी है। कई विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान को लेकर अमेरिकी रुख में थोड़ी भी नरमी भारत की सुरक्षा चिंताओं को प्रभावित कर सकती है। भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों को लेकर पाकिस्तान पर सख्त रुख अपनाता रहा है। ऐसे में अमेरिका द्वारा पाकिस्तान की बढ़ती प्रशंसा को लेकर सतर्कता स्वाभाविक मानी जा रही है।
ट्रंप की शैली रही है अलग
कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि ट्रंप की शैली पारंपरिक अमेरिकी नेताओं से अलग रही है। वह अक्सर अंतरराष्ट्रीय नेताओं और देशों को लेकर सार्वजनिक रूप से अप्रत्याशित टिप्पणियां करते रहे हैं। उनके बयान कई बार रणनीतिक दबाव, कूटनीतिक संतुलन या घरेलू राजनीति से भी प्रभावित होते हैं।
रक्षा और तकनीकी साझेदारी लगातार मजबूत
भारत और अमेरिका के बीच हाल के वर्षों में रक्षा समझौतों, तकनीकी निवेश और व्यापारिक सहयोग में तेजी आई है। दोनों देशों के बीच सैन्य अभ्यास और रणनीतिक साझेदारी भी लगातार मजबूत हुई है। Quadrilateral Security Dialogue (क्वाड) जैसे मंचों पर भी दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। यही कारण है कि अमेरिकी विदेश नीति के जानकार मानते हैं कि दोनों देशों के रिश्ते केवल किसी एक नेता की बयानबाजी पर आधारित नहीं हैं।
रणनीतिक धैर्य बनाए रखने की जरूरत
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भारत को अपनी विदेश नीति में संतुलन और रणनीतिक धैर्य बनाए रखना होगा। अंतरराष्ट्रीय संबंधों में स्थायी मित्रता से अधिक स्थायी हित महत्वपूर्ण होते हैं। अमेरिका और भारत दोनों के साझा हित इतने व्यापक हैं कि किसी एक दौर की राजनीतिक बयानबाजी से पूरी साझेदारी प्रभावित होना आसान नहीं होगा।
आगे की नीतियों पर टिकी नजर
फिर भी ट्रंप के पाकिस्तान को लेकर दिए जा रहे लगातार सकारात्मक संकेत भारत में चर्चा और असहजता का कारण बने हुए हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिकी प्रशासन की वास्तविक नीतियां किस दिशा में आगे बढ़ती हैं और भारत-अमेरिका संबंधों पर उनका कितना असर पड़ता है।







