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अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद रूस से तेल खरीद जारी रखेगा भारत, सरकार बोली- आपूर्ति में कोई दिक्कत नहीं

BPC News National Desk
5 Min Read

India ने एक बार फिर स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक हितों को प्राथमिकता देते हुए Russia से कच्चे तेल की खरीद जारी रखेगा।

अमेरिकी प्रतिबंधों में मिली छूट की अवधि समाप्त होने के बावजूद भारत ने रूस से तेल आयात पर कोई रोक नहीं लगाई है। सरकार का कहना है कि देश में तेल की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और रिफाइनरियों को किसी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ रहा है।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने क्या कहा?

पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने सोमवार को मीडिया ब्रीफिंग के दौरान साफ कहा कि रूस से भारत की कच्चे तेल की खरीद कभी भी अमेरिकी छूट व्यवस्था पर निर्भर नहीं रही है।

उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से व्यावसायिक समझ और आर्थिक हितों पर आधारित निर्णय है। भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तेल खरीद के फैसले लेता है।

तेल आपूर्ति को लेकर सरकार का भरोसा

सरकारी अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में देश में कच्चे तेल की आपूर्ति सुचारु रूप से जारी है और तेल कंपनियों या रिफाइनरियों के सामने किसी प्रकार की बाधा नहीं है।

भारत की तेल कंपनियां वैश्विक बाजार की परिस्थितियों, कीमतों और उपलब्धता के आधार पर खरीदारी करती हैं। ऐसे में रूस से तेल खरीद का निर्णय भी पूरी तरह व्यावसायिक दृष्टिकोण से लिया गया है।

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद बदला वैश्विक ऊर्जा बाजार

विशेषज्ञों का कहना है कि Russia-Ukraine War के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं।

पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर विभिन्न आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए, जिसके बाद रूस ने एशियाई देशों को रियायती दरों पर कच्चा तेल उपलब्ध कराना शुरू किया। भारत ने इस अवसर का लाभ उठाते हुए रूस से बड़े पैमाने पर तेल आयात बढ़ाया, जिससे देश को अपेक्षाकृत सस्ती दरों पर कच्चा तेल मिला।

भारत के लिए क्यों जरूरी है ऊर्जा सुरक्षा?

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी तेल उपभोक्ता अर्थव्यवस्था होने के कारण India के लिए ऊर्जा सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है।

देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। ऐसे में सरकार का मुख्य उद्देश्य स्थिर और सस्ती ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना है, ताकि घरेलू बाजार और उद्योगों पर अनावश्यक दबाव न पड़े।

भारत किसी एक देश पर निर्भर नहीं

पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत किसी एक देश पर निर्भर होकर तेल खरीद नहीं करता।

भारत विभिन्न देशों से तेल आयात करता है और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति तय करता है। हालांकि रूस से मिलने वाला अपेक्षाकृत सस्ता तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए लाभदायक साबित हुआ है।

महंगाई और ईंधन कीमतों पर असर

विश्लेषकों के अनुसार रूस से तेल आयात जारी रखने का एक बड़ा कारण आर्थिक संतुलन भी है।

यदि भारत को महंगे अंतरराष्ट्रीय बाजार से तेल खरीदना पड़े तो इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और घरेलू महंगाई पर पड़ सकता है। ऐसे में रियायती दरों पर उपलब्ध रूसी तेल भारत के लिए महत्वपूर्ण विकल्प बना हुआ है।

वैश्विक दबाव के बीच संतुलित रणनीति

अमेरिकी प्रतिबंधों और वैश्विक दबाव के बीच भारत ने पहले भी साफ किया था कि वह अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेगा।

विदेश नीति और ऊर्जा नीति दोनों में भारत संतुलन बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है। भारत ने लगातार यह रुख अपनाया है कि ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनी हुई है नजर

इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की ऊर्जा नीति पर नजर बनी हुई है।

कई पश्चिमी देशों ने रूस के साथ व्यापारिक संबंधों को सीमित करने की कोशिश की है, लेकिन भारत ने हमेशा व्यावहारिक और संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है। सरकार का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में देश के नागरिकों और उद्योगों को स्थिर ऊर्जा आपूर्ति उपलब्ध कराना सबसे जरूरी है।

फिलहाल नहीं है किसी संकट की आशंका

फिलहाल सरकार के बयान से यह साफ हो गया है कि अमेरिकी छूट की समय-सीमा समाप्त होने के बावजूद भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखेगा और देश में तेल आपूर्ति को लेकर किसी तरह की चिंता की स्थिति नहीं है।

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