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तेल संकट के बीच भारत का ‘थोरियम ट्रंप कार्ड’, ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम

BPC News National Desk
4 Min Read

नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान के बढ़ते तनाव के चलते वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। ऐसे समय में भारत के पास मौजूद एक अनमोल संसाधन—थोरियम—नई उम्मीद बनकर उभर रहा है। भारत के पास दुनिया के कुल थोरियम भंडार का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा है, जो उसे भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद मजबूत स्थिति में खड़ा करता है।

कलपक्कम PFBR ने हासिल की बड़ी उपलब्धि

हाल ही में तमिलनाडु के Kalpakkam स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इस रिएक्टर ने “क्रिटिकैलिटी” की उस अवस्था को छू लिया है, जहां नियंत्रित परमाणु प्रतिक्रिया स्थायी रूप से चल सकती है।

यह उपलब्धि इसलिए खास मानी जा रही है क्योंकि आगे चलकर इसी तकनीक के जरिए थोरियम आधारित ईंधन का उपयोग संभव होगा।

भारत का तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम

भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम तीन चरणों में विकसित किया गया है, जिसका अंतिम लक्ष्य थोरियम को प्रमुख ईंधन के रूप में उपयोग करना है।

थोरियम स्वयं ऊर्जा उत्पन्न नहीं करता, लेकिन इसे विशेष रिएक्टरों में यूरेनियम-233 में परिवर्तित कर बिजली उत्पादन में उपयोग किया जा सकता है। यह प्रक्रिया जटिल जरूर है, लेकिन सफल होने पर यह ऊर्जा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।

थोरियम की ऊर्जा क्षमता कितनी बड़ी?

विशेषज्ञों के अनुसार, थोरियम की ऊर्जा क्षमता बेहद विशाल है।

  • 1 किलोग्राम थोरियम से लगभग 24,000 मेगावाट थर्मल ऊर्जा
  • यह ऊर्जा लगभग 2,000 टन कोयले के बराबर है
  • या करीब 9.60 लाख लीटर तेल के बराबर ऊर्जा उत्पादन
  • एक किलोग्राम थोरियम से लगभग 1,000 घरों को एक साल तक बिजली मिल सकती है

तेल संकट में थोरियम क्यों अहम?

आज जब दुनिया जीवाश्म ईंधनों—तेल, गैस और कोयले—पर निर्भर है और भू-राजनीतिक तनावों के कारण उनकी आपूर्ति प्रभावित होती रहती है, तब थोरियम एक स्थायी विकल्प के रूप में उभर रहा है।

यह न केवल अधिक उपलब्ध है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है।

सुरक्षा और पर्यावरण लाभ

थोरियम आधारित परमाणु ऊर्जा के कई फायदे हैं:

  • रेडियोधर्मी कचरा कम और कम खतरनाक
  • परमाणु दुर्घटनाओं का जोखिम अपेक्षाकृत कम
  • दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा
  • कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी

भविष्य की चुनौतियाँ

हालांकि इस तकनीक को पूरी तरह विकसित करने में अभी समय लगेगा। वैज्ञानिकों को थोरियम को बड़े पैमाने पर उपयोग करने के लिए कई तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

लेकिन PFBR की सफलता इस दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो रही है।

भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम

भारत सरकार लंबे समय से ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में काम कर रही है। थोरियम इस लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

यदि भविष्य में थोरियम आधारित रिएक्टर सफल होते हैं, तो भारत की तेल और गैस आयात पर निर्भरता काफी कम हो सकती है।

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