राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई को हरिद्वार के पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
उनके निधन से उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। अंतिम यात्रा में हजारों लोगों का जनसैलाब उमड़ा और हर वर्ग के लोगों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
सेना और पुलिस ने दी अंतिम सलामी
अंतिम संस्कार के दौरान सेना और पुलिस के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर उन्हें अंतिम सलामी दी।
उनके पुत्र ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की रस्म पूरी की।
पूरे वातावरण में भावुकता और श्रद्धा का माहौल दिखाई दिया। लोगों ने “खंडूड़ी जी अमर रहें” के नारों के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी।
कई वरिष्ठ नेता और संत रहे मौजूद
इस अवसर पर, सहित कई वरिष्ठ नेता, संत और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
इसके अलावा,,,,,,, और समेत कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।
अनुशासन और ईमानदारी की मिसाल थे खंडूड़ी
मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी का जीवन अनुशासन, सादगी और ईमानदारी की मिसाल माना जाता रहा है।
भारतीय सेना में लंबे समय तक सेवा देने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई।
उन्हें एक सख्त लेकिन साफ-सुथरी छवि वाले नेता के रूप में जाना जाता था। उनके कार्यकाल में पारदर्शिता और सुशासन को विशेष महत्व दिया गया।
मुख्यमंत्री धामी ने जताया शोक
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि खंडूड़ी जी का निधन राज्य और देश के लिए अपूरणीय क्षति है।
उन्होंने कहा कि खंडूड़ी जी ने सेना, केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री के रूप में हर जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा और अनुशासन के साथ निभाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वे केवल एक राजनेता नहीं बल्कि एक मार्गदर्शक और अभिभावक की तरह थे, जिनकी कमी हमेशा महसूस की जाएगी।
मनोहर लाल खट्टर ने कहा- सादगी की मिसाल थे खंडूड़ी
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि खंडूड़ी जी का पूरा जीवन सादगी, अनुशासन और ईमानदारी का प्रतीक रहा।
उन्होंने कहा कि चाहे सेना का दायित्व हो, केंद्रीय मंत्री का पद हो या मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी, उन्होंने हर भूमिका को पूरी निष्ठा के साथ निभाया।
उन्होंने सुशासन और लोकपाल जैसे मुद्दों को मजबूती से आगे बढ़ाया, जिसे देश हमेशा याद रखेगा।

उत्तराखंड के विकास में रहा महत्वपूर्ण योगदान
राजनीति और प्रशासनिक क्षेत्र में खंडूड़ी जी की पहचान ऐसे नेता के रूप में रही जिन्होंने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया।
उत्तराखंड के विकास, सड़क परियोजनाओं और प्रशासनिक सुधारों में उनके योगदान को विशेष रूप से याद किया जाता है।
आम लोगों के बीच उनकी साफ छवि और सादगी ने उन्हें बेहद लोकप्रिय बनाया।
हमेशा याद किए जाएंगे बीसी खंडूड़ी
हरिद्वार में हुआ यह अंतिम संस्कार केवल एक राजनीतिक नेता को विदाई नहीं था, बल्कि उस व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि थी जिसने सेना से लेकर राजनीति तक हर क्षेत्र में अनुशासन और ईमानदारी की मिसाल कायम की।
का नाम उत्तराखंड और देश की राजनीति में हमेशा सम्मान के साथ लिया जाता रहेगा।








