थराली नगर में गुरुवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब करीब 100 वर्ष पुराने ऐतिहासिक “कपूर गली” भवन में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया और कुछ ही देर में यह ऐतिहासिक भवन धू-धू कर जलने लगा। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि आसपास के लोग दहशत में आ गए और पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
कुछ ही मिनटों में विकराल हुई आग

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह अचानक भवन से धुआं उठता दिखाई दिया। जब तक लोग कुछ समझ पाते, तब तक आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस, दमकल विभाग और प्रशासन को सूचना दी।
आग की भयावहता को देखते हुए आसपास के मकानों और दुकानों में रहने वाले लोग भी घरों से बाहर निकल आए। राहत की बात यह रही कि आग लगने के समय भवन में रह रहे मजदूर काम पर गए हुए थे, जिससे बड़ा हादसा टल गया और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
हालांकि भवन में रखा मजदूरों का घरेलू सामान, कपड़े, जरूरी दस्तावेज और अन्य सामग्री पूरी तरह जलकर राख हो गई। आग से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
दमकल टीम को करना पड़ा कड़ी मशक्कत
सूचना मिलते ही दमकल विभाग, पुलिस और तहसील प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। लेकिन भवन सड़क से कुछ दूरी पर स्थित होने के कारण दमकल कर्मियों को आग बुझाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
संकरी गलियों और पानी पहुंचाने में आई दिक्कतों के बावजूद टीमों ने कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। तब तक पूरी इमारत लगभग पूरी तरह नष्ट हो चुकी थी।
थराली की ऐतिहासिक पहचान था “कपूर गली” भवन
स्थानीय लोगों का कहना है कि “कपूर गली” भवन केवल एक पुरानी इमारत नहीं था, बल्कि थराली की ऐतिहासिक पहचान का हिस्सा था। यह भवन कभी क्षेत्र के पुराने बाजार और ट्रेजरी कार्यालय की गतिविधियों का केंद्र माना जाता था।
वर्षों पहले यह इलाका व्यापार और सामाजिक गतिविधियों से गुलजार रहता था। पुराने समय में यहां बड़ी संख्या में लोग आवाजाही करते थे और यह भवन नगर की शान माना जाता था।
जानकारी के अनुसार नए पुल के निर्माण और बाजार के विस्तार के बाद धीरे-धीरे इस भवन का महत्व कम होता गया। समय के साथ इमारत वीरान और जर्जर होती चली गई। रखरखाव के अभाव में इसकी हालत लगातार खराब होती रही, लेकिन इसके बावजूद यह भवन थराली की पुरानी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत की याद दिलाता था।
लोगों में नाराजगी और दुख
घटना के बाद स्थानीय लोगों में गहरा दुख और नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि यदि इस ऐतिहासिक भवन के संरक्षण की ओर समय रहते ध्यान दिया जाता तो शायद इसे बचाया जा सकता था।
कई लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि नगर की अन्य पुरानी धरोहरों को सुरक्षित रखने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
इसी दौरान यह जानकारी भी सामने आई कि यह भवन Sunita Rawat का पैतृक घर था, जो मुख्य बाजार क्षेत्र में स्थित था। घटना के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी दुख व्यक्त किया है।
शॉर्ट सर्किट की आशंका, जांच शुरू
प्रशासन द्वारा आग लगने के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक आशंका शॉर्ट सर्किट की जताई जा रही है, हालांकि वास्तविक कारणों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा।
तहसील प्रशासन ने नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है और प्रभावित मजदूरों को राहत उपलब्ध कराने की बात कही है।
सांस्कृतिक विरासत को बड़ा नुकसान
इस भीषण आग ने न केवल लोगों की यादों से जुड़ी एक ऐतिहासिक इमारत को खत्म कर दिया, बल्कि थराली की सांस्कृतिक विरासत को भी गहरा नुकसान पहुंचाया है।
अब स्थानीय लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि नगर की बची हुई ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने के लिए गंभीर प्रयास किए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से विरासत को बचाया जा सके।









