मणिपाल हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने उन्नत ईसीएमओ तकनीक की मदद से 60 वर्षीय महिला की जान बचाकर चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी सफलता हासिल की है। Kolkata की रहने वाली यह महिला गंभीर सीने के संक्रमण और फेफड़ों की विफलता के चलते बहु-अंग संकट की स्थिति में पहुंच गई थीं। लंबे और जटिल इलाज के बाद अब मरीज स्वस्थ होकर घर लौट चुकी हैं।
पहले से गंभीर ऑटोइम्यून बीमारी से थीं पीड़ित
डॉक्टरों के अनुसार महिला पहले से Systemic Lupus Erythematosus (एसएलई) नामक गंभीर ऑटोइम्यून बीमारी से पीड़ित थीं। इस बीमारी में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अपने ही अंगों और ऊतकों पर हमला करने लगती है।
लंबे समय से स्टेरॉयड थेरेपी लेने के कारण उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कमजोर हो चुकी थी। इसी वजह से उन्हें तेजी से बढ़ता निमोनिया और Acute Respiratory Distress Syndrome हो गया, जिससे उनके फेफड़े शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन पहुंचाने में असमर्थ हो गए।
गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती
मरीज को अत्यंत गंभीर स्थिति में अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में भर्ती कराया गया। उन्हें:
- तेज बुखार,
- सांस लेने में गंभीर परेशानी,
- पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द,
- और खून की खांसी
की शिकायत थी।
जांच में पता चला कि मरीज सर्कुलेटरी शॉक की स्थिति में थीं, जिसमें शरीर के महत्वपूर्ण अंगों तक रक्त प्रवाह प्रभावित होने लगता है।
वेंटिलेटर और प्रोन वेंटिलेशन भी नहीं आया काम
शुरुआती उपचार के दौरान मरीज को नॉन-इनवेसिव श्वसन सहायता दी गई, लेकिन ऑक्सीजन स्तर लगातार गिरता गया। इसके बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया।
डॉक्टरों ने प्रोन वेंटिलेशन जैसी आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया, लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं मिला। स्थिति लगातार गंभीर होती गई।
आखिर क्या है ECMO तकनीक?
स्थिति बेहद नाजुक होने पर डॉक्टरों ने मरीज को VV ECMO सपोर्ट पर रखने का फैसला लिया।
ECMO यानी Extracorporeal Membrane Oxygenation एक अत्याधुनिक जीवनरक्षक तकनीक है, जिसका उपयोग तब किया जाता है जब:
- फेफड़े,
- या हृदय
सामान्य उपचार से काम नहीं कर पाते।
इस तकनीक में शरीर के बाहर कृत्रिम फेफड़े की सहायता से रक्त में ऑक्सीजन मिलाई जाती है और कार्बन डाइऑक्साइड हटाकर रक्त को वापस शरीर में भेजा जाता है। इससे फेफड़ों को आराम और ठीक होने का समय मिलता है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने संभाला इलाज
इस जटिल केस का नेतृत्व:
- Dr. Sushrut Bandyopadhyay
- Dr. Ashok Verma
- और Dr. Shambhu Vishal
ने किया।
डॉ. सुष्रुत बंद्योपाध्याय ने बताया कि मरीज की स्थिति बेहद नाजुक थी और अधिकतम वेंटिलेटर सपोर्ट के बावजूद शरीर में पर्याप्त ऑक्सीजन बनाए रखना संभव नहीं हो पा रहा था।
उन्होंने कहा कि ECMO ने डॉक्टरों को संक्रमण नियंत्रित करने और फेफड़ों को ठीक होने का महत्वपूर्ण समय दिया।
इलाज के दौरान कई चुनौतियां
डॉ. अशोक वर्मा ने बताया कि उपचार के दौरान:
- रक्तस्राव,
- संक्रमण,
- और रक्त के थक्के बनने
का खतरा लगातार बना हुआ था।
उन्होंने कहा कि ट्रेकियोस्टॉमी सहित कई जटिल प्रक्रियाओं और निरंतर निगरानी के जरिए मरीज को सुरक्षित रखा गया।
दो सप्ताह बाद हालत में सुधार
डॉ. शंभू विशाल ने बताया कि कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण इलाज बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन पूरी मेडिकल टीम के समन्वित प्रयासों और लगातार क्रिटिकल केयर सपोर्ट से मरीज धीरे-धीरे स्वस्थ होती गईं।
करीब दो सप्ताह तक ECMO सपोर्ट पर रहने के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ और अंततः उन्हें बिना बाहरी सहायता के स्थिर अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
आधुनिक चिकित्सा और टीमवर्क का उदाहरण
मणिपाल हॉस्पिटल की इस सफलता को:
- उन्नत चिकित्सा तकनीक,
- विशेषज्ञ टीमवर्क,
- और समय पर उपचार
का बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है।







