Bpc News Digital

  • अपनी भाषा चुनें

You are Visiters no

817646
हमें फॉलो करें

भाषा चुनें

मोहन भागवत की Z+ सुरक्षा पर उठे सवाल, जनहित याचिका में खर्च खुद उठाने की मांग

BPC News National Desk
4 Min Read

नई दिल्ली: Mohan Bhagwat की Z+ सुरक्षा को लेकर देश में एक नई बहस छिड़ गई है। सामाजिक कार्यकर्ता Lalan Kishore Singh द्वारा दायर जनहित याचिका में यह मांग की गई है कि Rashtriya Swayamsevak Sangh प्रमुख को दी जा रही उच्च स्तरीय सुरक्षा का खर्च सरकार के बजाय स्वयं वहन करना चाहिए।

जनहित याचिका में उठाए गए मुख्य सवाल

याचिका में कहा गया है कि देश में सुरक्षा संसाधन सीमित हैं और उनका उपयोग प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए। इसमें तर्क दिया गया है कि Z+ श्रेणी की सुरक्षा आमतौर पर उन लोगों को दी जाती है, जो संवैधानिक पदों पर होते हैं या जिन पर गंभीर खतरे की आशंका होती है।

ऐसे में गैर-सरकारी पद पर आसीन व्यक्तियों के लिए सरकारी खर्च पर इतनी उच्च स्तर की सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना उचित नहीं माना गया है।

Z+ सुरक्षा क्या होती है और कितना होता है खर्च

Mohan Bhagwat को लंबे समय से Z+ श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है। इस श्रेणी में कई स्तरों की सुरक्षा व्यवस्था शामिल होती है, जिसमें सशस्त्र कमांडो, एस्कॉर्ट वाहन और 24 घंटे निगरानी शामिल रहती है।

इस प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था पर सरकार का भारी खर्च आता है, जिसे लेकर याचिकाकर्ता ने पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाई है।

खर्च खुद उठाने का सुझाव

Lalan Kishore Singh ने अपनी याचिका में यह भी कहा है कि यदि किसी व्यक्ति को निजी कारणों या संगठन से जुड़े होने के कारण खतरा है, तो उसे सुरक्षा का खर्च स्वयं वहन करना चाहिए।

उन्होंने सरकार से इस संबंध में स्पष्ट नीति बनाने की भी मांग की, जिससे यह तय किया जा सके कि किन परिस्थितियों में सरकारी खर्च पर सुरक्षा दी जानी चाहिए।

राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज

इस मुद्दे ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस को तेज कर दिया है। कुछ लोग इसे सार्वजनिक धन के उचित उपयोग से जुड़ा मुद्दा मान रहे हैं, जबकि अन्य का कहना है कि सुरक्षा का निर्णय केवल खतरे के आकलन के आधार पर होना चाहिए।

उनका मानना है कि यदि किसी व्यक्ति को वास्तविक खतरा है, तो उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

कानूनी विशेषज्ञों की राय

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की जनहित याचिकाएं नीतियों और व्यवस्थाओं की समीक्षा का अवसर प्रदान करती हैं। हालांकि, अंतिम निर्णय अदालत के विवेक पर निर्भर करेगा, जो सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट और खतरे के आकलन के आधार पर लिया जाएगा।

सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल इस मामले में सरकार या संबंधित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन यह स्पष्ट है कि इस याचिका के माध्यम से वीआईपी सुरक्षा और उसके खर्च को लेकर पारदर्शिता की मांग फिर से जोर पकड़ रही है।

पहले भी उठते रहे हैं ऐसे सवाल

देश में पहले भी वीआईपी सुरक्षा पर होने वाले खर्च को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कई बार यह बहस होती रही है कि क्या बड़ी संख्या में लोगों को उच्च स्तरीय सुरक्षा देना जरूरी है, जबकि आम नागरिकों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

अदालत के फैसले पर टिकी नजरें

कुल मिलाकर, Lalan Kishore Singh द्वारा दायर इस याचिका ने सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग और सुरक्षा व्यवस्था की प्राथमिकताओं से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब सभी की नजरें अदालत के फैसले पर टिकी हैं, जो इस मुद्दे पर आगे की दिशा तय करेगा।

Share This Article
bpcnews.in is one of the fastest-growing Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India-based news and stories
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *