देहरादून। ऑटिज़्म और इससे जुड़ी विकासात्मक स्थितियों को लेकर जागरूकता बढ़ाने और परिवारों को व्यावहारिक मार्गदर्शन देने की दिशा में इंडिया ऑटिज़्म सेंटर (IAC) ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। “ऑटिज़्म इन प्रैक्टिस” कार्यक्रम के तहत जीवनभर देखभाल और समर्थन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई।
विश्व ऑटिज़्म जागरूकता माह के तहत आयोजन
यह कार्यक्रम विश्व ऑटिज़्म जागरूकता माह के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसमें माता-पिता केंद्रित ज्ञान सत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया।
इसका उद्देश्य था:
- ऑटिज़्म के प्रति जागरूकता बढ़ाना
- परिवारों को व्यावहारिक मार्गदर्शन देना
- दीर्घकालिक देखभाल मॉडल पर चर्चा करना
कार्यक्रम में विशेषज्ञों की अहम भूमिका
कार्यक्रम में देशभर के कई विशेषज्ञ शामिल हुए, जिन्होंने ऑटिज़्म देखभाल पर अपने अनुभव साझा किए।
प्रमुख विशेषज्ञों में शामिल रहे:
- डॉ. सुदीप साहा
- डॉ. अरिजीत चट्टोपाध्याय
- डॉ. जशोधरा चौधुरी
- डॉ. मौसुमी मुखर्जी
- डॉ. अबीर मुखर्जी
- डॉ. नंदिता चट्टोपाध्याय
- डॉ. कौशांबी बसु
- डॉ. प्रदीप पारिया
- डॉ. एमडी साहिदुल अरेफिन
- डॉ. सिद्धार्थ नंदी
जीवनभर देखभाल और समावेशी मॉडल पर जोर
इंडिया ऑटिज़्म सेंटर के निदेशक एवं सीईओ जैशंकर नटराजन ने कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कहा कि सही जानकारी और संसाधन उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।
उन्होंने बताया कि संस्था “समावेश” नामक एक आवासीय इकोसिस्टम विकसित कर रही है, जो न्यूरोडाइवर्स व्यक्तियों के लिए सुरक्षित वातावरण प्रदान करेगा।
थेरेपी और व्यवहारिक समाधान पर सत्र
कार्यक्रम में विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए गए।
ऑक्यूपेशनल थेरेपी सत्र
डॉ. मनीष समनानी ने बच्चों में कार्यात्मक स्वतंत्रता बढ़ाने के लिए व्यावहारिक रणनीतियां साझा कीं।
मेडिसिन्स एंड बियॉन्ड
डॉ. रुद्रजीत सिन्हा ने चिकित्सा और थेरेपी आधारित समन्वय पर जोर दिया।
पोषण सत्र
प्रो. डॉ. कल्पना दत्ता ने बताया कि संतुलित आहार बच्चों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
माता-पिता के अनुभव बने प्रेरणा
कार्यक्रम में माता-पिता ने अपने अनुभव साझा किए, जिसमें:
- सुश्री नीलांजना रामबोथु
- सुश्री सुमित्रा पॉल बक्शी
ने अपनी जीवन यात्रा और चुनौतियों को बताया।
इस सत्र ने अन्य अभिभावकों को भावनात्मक रूप से प्रेरित किया।
किशोर बच्चों के व्यवहार पर विशेष चर्चा
सुश्री रंजना चक्रवर्ती ने प्री-टीन और टीन बच्चों के व्यवहार सुधार पर व्यावहारिक उपाय साझा किए, जिनमें:
- भावनात्मक नियंत्रण
- सामाजिक कौशल
- व्यवहार प्रबंधन
शामिल थे।
समापन और निष्कर्ष
कार्यक्रम का समापन डॉ. जशोधरा चौधुरी और सखी सिंघी के संबोधन के साथ हुआ।
इस पहल ने स्पष्ट किया कि:
- ऑटिज़्म देखभाल बहुआयामी है
- इसमें चिकित्सा के साथ सामाजिक समर्थन भी जरूरी है
- परिवारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है
निष्कर्ष
“ऑटिज़्म इन प्रैक्टिस” पहल ने न केवल जागरूकता बढ़ाई, बल्कि परिवारों को जीवनभर देखभाल की दिशा में सशक्त भी किया। यह कार्यक्रम समावेशी और संवेदनशील समाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।








