काठमांडू। नेपाल में नई सरकार के गठन के बाद क्षेत्रीय कूटनीति में हलचल तेज हो गई है। नेपाल एक चीन नीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है, क्योंकि प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व में बनी सरकार के दौरान चीन ने अपने कूटनीतिक और रणनीतिक प्रयासों को तेज कर दिया है।
सोमवार को नेपाल के गृह मंत्रालय में चीनी राजदूत झांग माओमिंग ने गृहमंत्री सुधान गुरुंग से शिष्टाचार मुलाकात की। इस महत्वपूर्ण बैठक में नेपाल ने स्पष्ट रूप से ‘एक चीन नीति’ के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
गृहमंत्री ने दोहराया ‘एक चीन नीति’ पर रुख
बैठक के बाद गृहमंत्री सुधान गुरुंग ने कहा कि नेपाल सरकार ‘एक चीन नीति’ का पूर्ण रूप से पालन करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नेपाली भूमि का उपयोग चीन के खिलाफ किसी भी गतिविधि के लिए नहीं होने दिया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि बालेन शाह सरकार देश की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
भारत-चीन के बीच संतुलन की रणनीति
यह बैठक ऐसे समय पर हुई है जब नेपाल की नई सरकार भारत और चीन के बीच संतुलित संबंध बनाए रखने की नीति पर काम कर रही है।
प्रधानमंत्री बालेन शाह हाल ही में पदभार संभालने के बाद कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय हुए हैं और जल्द ही भारत की यात्रा पर जाने वाले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें आधिकारिक निमंत्रण दिया है, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है।
चीनी नागरिकों और वीजा मुद्दे पर चर्चा
गृहमंत्री सुधान गुरुंग और चीनी राजदूत झांग माओमिंग के बीच हुई बैठक में नेपाल में बिना वैध वीजा के रह रहे चीनी नागरिकों के मुद्दे पर भी चर्चा हुई।
नेपाल ने चीन से सहयोग की अपील की ताकि ऐसे नागरिकों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया को तेज किया जा सके।
नेपाल-चीन रेलवे परियोजना पर जोर
बैठक में नेपाल सरकार ने चीन से अनुरोध किया कि वह नेपाल में चल रही अपनी परियोजनाओं को समय पर पूरा करे। विशेष रूप से नेपाल-चीन रेलवे परियोजना को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
यह परियोजना नेपाल के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इससे हिमालयी क्षेत्र में कनेक्टिविटी और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
चीन बढ़ा रहा है कूटनीतिक सक्रियता
बालेन शाह सरकार के गठन के बाद चीन लगातार नेपाल के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय दिखाई दे रहा है।
हाल ही में प्रधानमंत्री बालेन शाह ने विभिन्न देशों के राजदूतों के साथ बैठक की, जिसमें चीनी प्रतिनिधियों ने नेपाल के विकास में चीन की भूमिका और सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई।
चीन ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत नेपाल के साथ साझेदारी को और मजबूत करने की भी बात कही है।
विश्लेषकों की राय: संतुलित विदेश नीति की कोशिश
विश्लेषकों का मानना है कि नेपाल की नई सरकार एक संतुलित विदेश नीति अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
एक ओर भारत के साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर चीन के साथ आर्थिक और बुनियादी ढांचे से जुड़े सहयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
सुरक्षा और सीमा प्रबंधन पर भी चर्चा
बैठक के दौरान सुरक्षा सहयोग, सीमा प्रबंधन और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई।
गृहमंत्री गुरुंग की टिप्पणी से स्पष्ट है कि नेपाल सरकार क्षेत्रीय संवेदनशील मुद्दों पर सतर्क रुख अपनाते हुए अपनी संप्रभुता को प्राथमिकता दे रही है।
भू-राजनीतिक नजरिया: भारत की भी नजर
नेपाल-चीन रेलवे परियोजना को लेकर भू-राजनीतिक महत्व भी जुड़ा हुआ है। इस परियोजना की प्रगति पर भारत की नजर बनी रहती है, क्योंकि यह क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है।
नई सरकार, नई कूटनीतिक दिशा
बालेन शाह सरकार के आने के बाद नेपाल की विदेश नीति में नई गतिशीलता देखने को मिल रही है। युवा नेतृत्व सुधारवादी एजेंडे के साथ-साथ कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
भारत यात्रा और चीन के साथ बढ़ते संपर्क इसी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।
निष्कर्ष: संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती
कुल मिलाकर, नेपाल एक चीन नीति को लेकर नई सरकार का स्पष्ट रुख सामने आया है। अब यह देखना अहम होगा कि बालेन शाह सरकार भारत और चीन के बीच संतुलन को कितनी प्रभावी तरीके से बनाए रख पाती है।
क्षेत्रीय शक्तियों के बढ़ते प्रभाव के बीच नेपाल की कूटनीतिक रणनीति आने वाले समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।







