Srinagar स्थित Hemvati Nandan Bahuguna Garhwal University में ‘नरेन्द्र संगीत सप्ताह’ का भव्य शुभारंभ हुआ। लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केन्द्र द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने पहले ही दिन सांस्कृतिक रंगों से माहौल को जीवंत कर दिया। देशभर से 80 से अधिक प्रतिभागियों ने इसमें भाग लिया।
नरेन्द्र सिंह नेगी के संगीत को समर्पित आयोजन
यह आयोजन Narendra Singh Negi के गीत-संगीत को समर्पित है। लगभग 52 वर्षों से गढ़वाली संगीत जगत में सक्रिय नेगी के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसे उत्तराखण्ड की लोकसंस्कृति को सहेजने की एक अनूठी पहल माना जा रहा है।
कुलपति ने किया कार्यक्रम का उद्घाटन
कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति Shriprakash Singh ने किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने नरेन्द्र सिंह नेगी को उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा बताया।
लोक संस्कृति संरक्षण के लिए विशेष केंद्र
कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा गढ़वाली भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए एक विशेष केंद्र स्थापित किया गया है। इसके माध्यम से पारंपरिक वाद्ययंत्रों, लोक परंपराओं और कलाकारों की धरोहर को सहेजने का कार्य किया जाएगा।
नेगी की प्रस्तुति ने बांधा समां
कार्यक्रम में स्वयं नरेन्द्र सिंह नेगी की उपस्थिति विशेष आकर्षण रही। उन्होंने अपने लोकप्रिय गीत “ठंडो रे ठंडो मेरा पाड़ै…” की प्रस्तुति दी, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा और पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा।
‘नरेन्द्र संगीत’ को परंपरा बनाने की पहल
कार्यक्रम के संस्थापक D. R. Purohit ने कहा कि जिस तरह बंगाल में ‘रवीन्द्र संगीत’ की परंपरा है, उसी प्रकार उत्तराखण्ड में ‘नरेन्द्र संगीत’ की परंपरा स्थापित की जा सकती है। उन्होंने इसे एक सांस्कृतिक आंदोलन की शुरुआत बताया।
कलाकारों ने दी शानदार प्रस्तुतियां
पहले दिन के कार्यक्रम में हेमलता बिष्ट, अम्बिका किमोठी, डॉ. सर्वेश सुयाल, सूमा रावत, लव मैठाणी, अंकित भट्ट, शकुन्तला नेगी, प्राची कण्डवाल और महेन्द्र सिंह पंवार जैसे कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया। कई नए कलाकारों को पहली बार मंच मिलने से उनकी प्रतिभा को निखारने का अवसर मिला।
बड़ी संख्या में पहुंचे सांस्कृतिक प्रेमी
कार्यक्रम का संचालन डॉ. संजय पाण्डेय और गणेश खुगशाल ‘गणी’ ने किया। इस दौरान बिपिन बलूनी, प्रो. वाई.एस. रैवानी, प्रो. ओ.पी. गुसाईं और प्रो. मोहन सिंह पंवार सहित बड़ी संख्या में सांस्कृतिक प्रेमी मौजूद रहे।
निष्कर्ष: लोकसंस्कृति को वैश्विक मंच देने की पहल
‘नरेन्द्र संगीत सप्ताह’ केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की लोक परंपराओं को संरक्षित करने और उन्हें वैश्विक मंच तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।








