Sudhan Gurung ने गृह मंत्री पद से इस्तीफा देकर Nepal की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम पैदा कर दिया है। महज 26 दिनों के कार्यकाल के बाद उनका पद छोड़ना राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
उनके इस्तीफे के पीछे भ्रष्टाचार और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से जुड़े गंभीर आरोप बताए जा रहे हैं, जिनके कारण उन पर लगातार दबाव बढ़ रहा था।
कारोबारी संबंधों और निवेश पर उठे सवाल
रिपोर्ट्स के अनुसार, गुरुंग पर विवादास्पद कारोबारी Deepak Bhatta के साथ कथित साझेदारी और माइक्रो इंश्योरेंस कंपनियों में संदिग्ध निवेश के आरोप लगे।
इन आरोपों के सामने आने के बाद विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। देशभर में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए और उनके इस्तीफे की मांग उठने लगी।
भ्रष्टाचार के खिलाफ रुख, लेकिन खुद पर आरोप
गृह मंत्री बनने के बाद गुरुंग ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया था और कई मामलों में कार्रवाई के संकेत दिए थे।
लेकिन जल्द ही उनके अपने निवेश और कारोबारी संबंधों पर सवाल उठने लगे। विपक्ष ने उन पर आय से अधिक संपत्ति और संदिग्ध लेनदेन में शामिल होने के आरोप लगाए, जिससे राजनीतिक दबाव और बढ़ गया।
मीडिया खुलासों से बढ़ा दबाव
नेपाली मीडिया में कथित दस्तावेजों का जिक्र किया गया, जिनमें उनके निवेश और कारोबारी संबंधों से जुड़े तथ्य सामने आए।
इन खुलासों के बाद सरकार की साख पर भी सवाल उठने लगे और सामाजिक संगठनों के साथ युवाओं ने पारदर्शिता की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किए।
फेसबुक पोस्ट के जरिए इस्तीफे की घोषणा
बढ़ते दबाव के बीच सुधन गुरुंग ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने इस्तीफे की घोषणा की। उन्होंने कहा कि उन्होंने 26 मार्च 2026 से अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन किया, लेकिन हाल में उठे सवालों को उन्होंने गंभीरता से लिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी पद से ज्यादा महत्वपूर्ण जनता का विश्वास और नैतिकता होती है।
“जेनरेशन जेड” और पारदर्शिता पर जोर
गुरुंग ने अपने बयान में “जेनरेशन जेड” का जिक्र करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रही है।
उन्होंने अपने इस्तीफे को नैतिक निर्णय बताते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में उठने वाले सवालों का जवाब देना जरूरी होता है।
राजनीतिक असर और आगे की दिशा
विश्लेषकों का मानना है कि यह इस्तीफा नेपाल में बढ़ती पारदर्शिता की मांग को दर्शाता है, लेकिन साथ ही यह सरकार की छवि पर भी असर डालता है।
यह घटनाक्रम दिखाता है कि अब जनता और मीडिया की निगरानी पहले से अधिक मजबूत हो गई है और किसी भी प्रकार की अनियमितता तुरंत सामने आ जाती है।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मामले की जांच किस दिशा में जाती है और इसका नेपाल की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।








