Narendra Modi ने देशवासियों से ईंधन की बचत और संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग की अपील करते हुए कहा कि आने वाले समय में “वर्क फ्रॉम होम” व्यवस्था को बढ़ावा देना जरूरी होगा। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का असर भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे समय में देश को ऊर्जा संरक्षण और आत्मनिर्भरता की दिशा में गंभीरता से काम करना होगा।
वैश्विक युद्ध और तेल संकट का जिक्र
Narendra Modi ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले दो महीनों से भारत के पड़ोसी क्षेत्र में बड़ा युद्ध चल रहा है, जिसका प्रभाव पूरी दुनिया पर दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि इस संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और ऊर्जा की कीमतों को प्रभावित किया है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए वैश्विक संकट का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर पड़ता है।
पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील
प्रधानमंत्री ने लोगों से पेट्रोल और डीजल का संयम से इस्तेमाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि लोग अनावश्यक यात्रा कम करें, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाएं और जरूरत के अनुसार ही ईंधन का इस्तेमाल करें, तो इससे देश को बड़ा फायदा हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा बचत केवल आर्थिक जरूरत नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिए भी बेहद जरूरी है।
‘वर्क फ्रॉम होम’ मॉडल को बढ़ावा देने पर जोर
Narendra Modi ने विशेष रूप से “वर्क फ्रॉम होम” यानी घर से काम करने की व्यवस्था को बढ़ावा देने की बात कही।
उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान देश और दुनिया ने देखा कि कई क्षेत्रों में घर से काम करने की व्यवस्था सफल रही। इससे ट्रैफिक कम हुआ, ईंधन की खपत घटी और लोगों का समय भी बचा।
प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि जहां संभव हो, वहां कंपनियां और संस्थान सप्ताह में कुछ दिन वर्क फ्रॉम होम मॉडल अपनाने पर विचार करें।
डिजिटल इंडिया और बदलता कार्य संस्कृति मॉडल
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत तेजी से डिजिटल और तकनीकी रूप से मजबूत हो रहा है। इंटरनेट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के विस्तार ने काम करने के तरीके को बदल दिया है।
उनके अनुसार कई क्षेत्रों में बिना दफ्तर गए भी बेहतर तरीके से काम किया जा सकता है। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी बल्कि प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी।
ऊर्जा संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की अपील
Narendra Modi ने लोगों से ऊर्जा संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि अगर देश का हर नागरिक ईंधन बचाने का संकल्प ले, तो भारत विदेशी तेल पर अपनी निर्भरता काफी हद तक कम कर सकता है। साथ ही सरकार लगातार सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और हरित ऊर्जा जैसे वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही है।
विशेषज्ञों ने भी किया समर्थन
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है।
उद्योग जगत के कई विशेषज्ञों ने भी हाइब्रिड वर्क मॉडल का समर्थन किया है। उनका कहना है कि कुछ दिन ऑफिस और कुछ दिन घर से काम करने की व्यवस्था भविष्य में ज्यादा लोकप्रिय हो सकती है।
इससे कंपनियों की लागत कम होगी और कर्मचारियों को भी सुविधा मिलेगी।
जिम्मेदार नागरिकता का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश केवल आर्थिक बचत तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच जिम्मेदार नागरिकता और संसाधनों के संतुलित उपयोग का संदेश भी माना जा रहा है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार, निजी संस्थान और आम लोग इस दिशा में कितनी गंभीरता से कदम उठाते हैं।








