प्रधानमंत्री की हालिया यात्रा ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत की विदेश नीति में खाड़ी देशों का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है।
पिछले एक दशक में भारत और यूएई के रिश्ते केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहे, बल्कि अब वे रणनीतिक रक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, निवेश, तकनीक और समुद्री सहयोग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक फैल चुके हैं।
यही वजह है कि पीएम मोदी की 15 मई को हुई यूएई यात्रा को दोनों देशों के संबंधों में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है।
पिछले 12 वर्षों में पीएम मोदी की आठवीं यूएई यात्रा
प्रधानमंत्री मोदी की यह पिछले 12 वर्षों में यूएई की आठवीं यात्रा रही।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी लगातार उच्चस्तरीय यात्राएं इस बात का संकेत हैं कि भारत सरकार खाड़ी क्षेत्र के साथ दीर्घकालिक और स्थायी साझेदारी को लेकर गंभीर है।
इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी, ऊर्जा सहयोग और निवेश से जुड़े कई अहम समझौते हुए।
ऊर्जा सुरक्षा को लेकर हुआ बड़ा समझौता
सबसे महत्वपूर्ण समझौतों में से एक के साथ हुआ एमओयू रहा।
इस समझौते के तहत भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों में 30 मिलियन बैरल तक तेल संग्रहित किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच यह समझौता भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में मदद करेगा।
एलपीजी और निवेश सहयोग पर भी बनी सहमति
यात्रा के दौरान एलपीजी आपूर्ति को लेकर दीर्घकालिक समझौता भी हुआ है, जिससे भारत की घरेलू गैस जरूरतों को स्थिरता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
इसके अलावा यूएई ने भारत में करीब 5 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया है।
माना जा रहा है कि यह निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और तकनीकी क्षेत्रों में किया जाएगा, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे।
फाइटर जेट एस्कॉर्ट बना चर्चा का केंद्र
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का सबसे चर्चित दृश्य तब सामने आया जब उनका विमान यूएई के एयरस्पेस में पहुंचा और वहां के फाइटर जेट्स ने उसे एस्कॉर्ट किया।
विशेषज्ञ इसे केवल औपचारिक स्वागत नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे और रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक मान रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में इस तरह का सैन्य सम्मान विशेष महत्व रखता है।
रक्षा सहयोग को मिलेगी नई दिशा
भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को लेकर जिस ढांचे पर सहमति बनी है, उसमें रक्षा उद्योग, अत्याधुनिक तकनीक, सैन्य प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास, समुद्री सुरक्षा और साइबर सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।
हालांकि फिलहाल यह “लेटर ऑफ इंटेंट” के रूप में प्रारंभिक दस्तावेज है, लेकिन आने वाले समय में विस्तृत रक्षा समझौतों पर बातचीत आगे बढ़ सकती है।
हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ सकती है रणनीतिक सक्रियता
विश्लेषकों का मानना है कि भारत और यूएई के मजबूत होते रिश्तों का असर पूरे पश्चिम एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र की रणनीतिक राजनीति पर भी पड़ सकता है।
के बढ़ते प्रभाव, वैश्विक ऊर्जा संकट और समुद्री सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत खाड़ी देशों के साथ अपने संबंधों को नए स्तर पर ले जाने की कोशिश कर रहा है।
भारतीय प्रवासियों और व्यापार को मिलेगा लाभ
मोदी सरकार की खाड़ी नीति का एक अहम उद्देश्य वहां रह रहे लाखों भारतीयों के हितों की सुरक्षा भी है।
आज भारत का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार बन चुका है और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत होते संबंधों से व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
भारत की वैश्विक कूटनीति को मिल रही मजबूती
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा यह संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में भारत और यूएई के रिश्ते केवल मित्रता तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलते जाएंगे।
रक्षा, ऊर्जा और निवेश के क्षेत्र में बढ़ती यह नजदीकी भारत की वैश्विक कूटनीतिक स्थिति को भी मजबूत करने वाली मानी जा रही है।








