चमोली। उत्तराखंड के चमोली जनपद में स्थित विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी आज से पर्यटकों के लिए खोल दी गई है। इसके साथ ही देश-विदेश से आने वाले प्रकृति प्रेमियों, ट्रेकर्स और पर्यटकों के लिए हिमालय की इस अनमोल धरोहर के द्वार फिर से खुल गए हैं। नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान प्रशासन द्वारा निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद घाटी में पर्यटकों की आवा
जाही शुरू कर दी गई है। घाटी के खुलते ही पर्यटन व्यवसायियों और स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल है।
हिमालय की गोद में बसी फूलों की घाटी अपनी अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता, दुर्लभ पुष्प प्रजातियों और समृद्ध जैव विविधता के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। हर वर्ष हजारों पर्यटक यहां पहुंचकर प्रकृति के इस अनूठे स्वरूप का आनंद लेते हैं। समुद्र तल से लगभग 3,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह घाटी रंग-बिरंगे फूलों से सजी प्राकृतिक चित्रशाला जैसी प्रतीत होती है।

फूलों की घाटी को प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं माना जाता। यहां सैकड़ों प्रजातियों के दुर्लभ फूल और हिमालयी जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं, जिनमें कई औषधीय महत्व की भी हैं। घाटी की अनूठी पारिस्थितिकी और जैव विविधता को देखते हुए UNESCO ने इसे विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्रदान किया है। यही कारण है कि यह स्थान भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
हर साल की तरह इस बार भी जून माह के शुरुआती सप्ताह में घाटी को पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। आमतौर पर यह घाटी अक्टूबर के अंतिम सप्ताह तक या बर्फबारी शुरू होने तक पर्यटकों के लिए खुली रहती है। इस दौरान बड़ी संख्या में ट्रेकर्स और प्रकृति प्रेमी यहां पहुंचते हैं। घाटी तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को गोविंदघाट से घांघरिया होते हुए पैदल यात्रा करनी पड़ती है, जो अपने आप में एक रोमांचक अनुभव माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार फूलों की घाटी का वास्तविक सौंदर्य मानसून के आगमन के बाद देखने को मिलता है। जुलाई से सितंबर के बीच यहां फूलों की बहार अपने चरम पर पहुंच जाती है। इस दौरान पूरी घाटी विभिन्न रंगों के फूलों से ढक जाती है, जो किसी प्राकृतिक कालीन जैसी दिखाई देती है। इस मौसम में घाटी का दृश्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।
घाटी में पाए जाने वाले प्रमुख फूलों में ब्रह्म कमल, ब्लू पोस्ता, कोबरा लिली, प्रिमुला, एनेमोनी, पोटेंटिला और कई अन्य दुर्लभ हिमालयी पुष्प शामिल हैं। इनमें से कई प्रजातियां केवल हिमालयी क्षेत्रों में ही पाई जाती हैं। इन फूलों के खिलने से पूरी घाटी रंगों की अद्भुत दुनिया में बदल जाती है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक यहां पहुंचते हैं।
फूलों की घाटी के खुलने से स्थानीय पर्यटन उद्योग को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। होटल, होमस्टे, ट्रैवल एजेंसियां, पोर्टर, घोड़ा-खच्चर संचालक और स्थानीय व्यापारी इस पर्यटन सीजन से बेहतर कारोबार की उम्मीद कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि घाटी का पर्यटन उनके रोजगार और आय का प्रमुख स्रोत है।
वन विभाग और नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान प्रशासन ने पर्यटकों से पर्यावरण संरक्षण के नियमों का पालन करने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा है कि घाटी की नाजुक पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है। पर्यटकों को प्लास्टिक का उपयोग न करने, कचरा निर्धारित स्थानों पर डालने और वन्यजीवों एवं वनस्पतियों को नुकसान न पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
फूलों की घाटी का खुलना उत्तराखंड के पर्यटन सीजन की एक महत्वपूर्ण शुरुआत माना जाता है। आने वाले महीनों में यहां हजारों पर्यटकों के पहुंचने की संभावना है। हिमालय की गोद में बसी यह प्राकृतिक धरोहर एक बार फिर अपने रंग-बिरंगे फूलों, दुर्लभ वनस्पतियों और मनमोहक दृश्यों के साथ पर्यटकों का स्वागत करने के लिए तैयार है।








